काशीपुर। क्षेत्र के गिरीताल का पौराणिक और धार्मिक महत्व है लेकिन प्रशासन और पर्यटन विभाग की उपेक्षा से यह आज बदहाली की कगार पर पहुंच गया है। इस ताल को नौकायन के लिए विकसित करने की योजना थी लेकिन आज इसमें सिर्फ सिंघाड़ा उगाया जा रहा है। घरों का गंदा पानी भी इसमें छोड़ा जाता है जिससे इसमें अब मछली भी नहीं दिखती है। सफाई के अभाव में ताल गंदगी और घास से भरा है।
गिरीताल मंदिर समूह और चामुंडा मंदिर समूह के बीच करीब 12 एकड़ में एतिहासिक गिरीताल है। इसकी देखरेख की व्यवस्था भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की ओर से बनाई गई समिति हिंदी प्रेम सभा करती है। इसके पास ही स्थित चामुंडा मंदिर परिसर में पर्वतीय समाज के लोगों का उत्तरायणी मेला भी लगता है। हिंदी प्रेम सभा ने करीब दस साल पहले गिरीताल में नौकायन की योजना बनाई थी जो एक साल तक चला। कुछ लोगों के विरोध के चलते इसे बंद करना पड़ा। सभा के कोषाध्यक्ष मनोज कौशिक बताते हैं कि ताल के रखरखाव में लाखों रुपये का खर्च आता है। आय के कोई साधन नहीं हैं और प्रशासन भी कोई मदद नहीं करता है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी गिरीताल का भ्रमण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का एलान किया था लेकिन अभी तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई।
गिरीताल का कितना क्षेत्र नगर निगम के पास है अभी यह स्पष्ट नहीं है। क्षेत्रफल का आकलन करने के बाद नगर निगम ताल का रखरखाव करेगा। इसके लिए तैयारी चल रही है।
- ऊषा चौधरी, मेयर नगर निगम।