मूसलाधार बारिश के बीच असलहों से लैस तस्करों और वन्यजीवों से सामना होने के डर से आंखों की नींद गायब थी। बारिश से पानी-पानी और फिसलन भरे हो चुके कच्चे रास्तों में गिरते पड़ते चार घंटे लगातार चलता रहा। एक सूखी जगह दिखने पर आराम तो किया मगर आंखें खुलीं रखीं। सुबह होने पर जब साथी वनकर्मियों से मुलाकात हुई तो एक नया जीवन मिलने के लिए भगवान को धन्यवाद दिया...। यह कहना है तस्करों से मुठभेड़ के बाद जंगल में भटके 57 वर्षीय वन दरोगा आनंद पंत का।
वन दरोगा आनंद पंत ने पूर्वी गदगदिया बीट में मंगलवार की रात हुई घटना को बताते हुए कहा कि छह लोगों की टीम की लकड़ी तस्करों से मुठभेड़ हुई थी। तस्कर हवाई फायरिंग करते हुए 20 से 30 मीटर तक आ गए थे तो टीम के सदस्य जान बचाने के लिए इधर-उधर हो गए थे।
वे भी वहां से निकले और जंगल में रास्ता भटक गए थे। गूजर झाला नजदीक होने के अनुमान लगाते हुए वे जो रास्ता मिला, उसी पर चलते चले गए थे। भारी बारिश के बीच कच्चे रास्तों पर कहीं दो फुट तो कहीं चार फुट तक पानी भरा हुआ था। कई बार रास्ते पर फिसलकर गिरे और उठकर चले।
असलहों से लैस तस्करों के अलावा हाथी, बाघ, तेंदुए से सामना होने का दोहरा खतरा दिमाग पर चल रहा था। करीब दस बजे टीम से बिछड़ने के बाद दो बजे तक लगातार जंगल में चलते रहे थे। इसी बीच बारिश से बची सूखी जगह मिलने पर वहां थककर बैठ गए और सुबह होने का इंतजार किया था। सुबह होने पर वह सिग्नल में आए और छह बजे टीम से संपर्क हो गया था।
बताया कि रास्ताें में चलने के दौरान उनको पैर और अन्य जगह पर चोटें भी आई हैं। वर्तमान में वह निहाल चौकी में हैं और भयावह रात की थकान से उबरे नहीं हैं। इस रेंज में आए एक साल ही हुआ है और जंगल से पूरी तरह से वाकिफ नहीं होने के चलते वे इस ऐसी स्थिति से गुजरे थे। यह घटना हमेशा के लिए उनके जेहन में घर कर गई है।
तस्करों से मुठभेड़ की दर्ज नहीं कराया केस
गदगदिया रेंज के जंगल में वनकर्मियों पर फायर करने वाले लकड़ी तस्करों पर वन विभाग की ओर से केस दर्ज नहीं कराया गया है। विभाग तस्करों को चिह्नित करने में जुटा है। मंगलवार रात पूर्वी गदगदिया बीट में लकड़ी तस्करों और वनकर्मियों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। वनकर्मियों की ओर से दो और तस्करों ने 22 फायर किए थे। हालांकि घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। घटना के दो दिन बाद भी पुलिस को मामले की तहरीर नहीं दी गई है। बताया जा रहा है कि तस्करों ने चार पेड़ काटे थे लेकिन वन महकमा इससे इन्कार कर रहा है।
तस्करों की ओर से पेड़ कटाने की पुष्टि नहीं हुई है। तस्करों के जंगल में घुसते ही उनका सामना वनकर्मियों से हो गया था। तस्करों को चिह्नित किया जा रहा है और इस मामले में अभी केस दर्ज नहीं कराया गया है।
- यूसी तिवारी, डीएफओ, तराई केंद्रीय वन प्रभाग