ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब के पूर्व रिसीवर ज्ञानी स्वर्ण सिंह की गिरफ्तारी को लेकर तीसरे दिन भी डेरा कारसेवा में तनाव की स्थिति रही। सिख संगत ने पूर्व रिसीवर की गिरफ्तारी की निंदा की। संगत ने सुमिरन पाठ कर राज्य सरकार और पुलिस के खिलाफ विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि सिख धर्म शांति और सेवा का प्रतीक है। संगत को आपसी प्रेम, भाईचारा बनाए रखना चाहिए। गुरुद्वारा प्रबंध समिति के चुनाव के लिए संगत को मिल बैठकर फैसला लेना होगा।
सोमवार को डेरा कारसेवा में पूर्व रिसीवर ज्ञानी स्वर्ण सिंह की गिरफ्तारी से आक्रोशित संगत ने बैठक की। इसमें जरनैल सिंह सुनपहर ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधन को लेकर कोर्ट में चल रहे विवाद को वापस लेकर चुनाव किया जाए। इसके लिए डेरा भी सहमत है और पहले भी डेरे ने प्रयास किए। लेकिन, निजी स्वार्थों के टकराव से पक्ष नहीं माने। सेवा सिंह बेरीघाट ने कहा कि विवाद कुछ और है, जिसे रूप कुछ और दिया जा रहा है।
सूबेदार बाबा चन्नन सिंह ने कहा कि गुरुग्रंथ साहिब की हाजिरी में संगत बैठक कर फैसला ले। जिसे सभी को मानना चाहिए। गुरुद्वारे पर सरकार द्वारा नियुक्त रिसीवर का कब्जा है, न कि बाबा तरसेम सिंह का है। बाबाओं का काम संगत की सेवा करना है। इस दौरान संगत ने पूर्व रिसीवर की गिरफ्तारी की घटना की निंदा भी की और शांतिपूर्ण तरीके से राज्य सरकार व पुलिस का विरोध जताने के लिए सुमिरन पाठ किया। संचालन शिरोमणि अकाली दल के उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष अजीत पाल सिंह ने किया। इस मौके पर नानकपुरी के बाबा गुरजंट सिंह, काशीपुर के बाबा जरमल सिंह, बाबा पाल सिंह पीलीभीत, बाबा अजायब सिंह पूरनपुर, बाबा गुरदीप सिंह विलासपुर, देवेंद्र सिंह, स. लक्खा सिंह, जगतार सिंह, गुरसाहब सिंह, रमेश पांडे, मंगत सिंह, लखविंदर सिंह, परमजीत सिंह, बरियाम सिंह, फकीर सिंह, हरजीत सिंह आदि थे।