उत्तराखंड में 20 अक्तूबर से बाल गणना शुरू होने जा रही है। बाल गणना में तीन से 18 साल के ऐसे बच्चों की संख्या जुटाई जाएगी, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा या जिन्होंने प्रवेश लेने के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया।
पूरे प्रदेश में 20 अक्तूबर से बाल गणना शुरू होने जा रही है। बाल गणना में तीन से 18 साल के ऐसे बच्चों की संख्या जुटाई जाएगी, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा या जिन्होंने प्रवेश लेने के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया। शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों का आंकड़ा जुटाएगा और चिह्नित बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराएगा।
विज्ञापन
पहले छह से 14 साल तक के बच्चे होते थे गणना में शामिल
हर साल बाल गणना की जाती है। पिछले साल तक छह से 14 साल तक के बच्चों को बालगणना में शामिल किया जाता था। लेकिन तीन से 18 साल तक के बच्चों को बालगणना में शामिल किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में बालगणना एक साथ की जाएगी।
साल 2022-23 में विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या
ब्लॉक बालक बालिकाएं
खटीमा 19 22
रुद्रपुर 339 290
सितारगंज 21 35
गदरपुर 07 17
बाजपुर 54 43
काशीपुर 09 05
जसपुर 37 48
गणना के केंद्र में भीख मांगने वाले बच्चे
विज्ञापन
बाल गणना के केंद्र में बस्तियों के साथ ही कूड़ा बीनने, भीख मांगने वाले बच्चों होंगे। दिव्यांग बच्चों को उनकी दिव्यांगता के आधार पर अलग अलग श्रेणियों में रखकर बालगणना की जाएगी।
इन्हें सौंपी जाएगी बालगणना की जिम्मेदारी
इस साल शिक्षकों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी बाल गणना करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक सेक्टर नोडल के रूप में नियुक्त किए गए हैं। सीईओ और जिला परियोजना अधिकारी जनपद स्तर के नोडल अधिकारी रहेंगे। विकासखंड स्तर पर खंड अधिकारी और उपशिक्षाधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक और सहप्रधानाध्यापक बालगणना का कार्य करेंगे।
प्रपत्र आते ही बालगणना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। बाल गणना का कार्य सुचारू रूप से करने के लिए बीईओ को निर्देश दिए गए हैं और डीएम की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। इस वर्ष शिक्षकों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बाल गणना में शामिल होंगी। - रमेश चंद्र आर्या, सीईओ