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Rudrapur: सीएमआरएफ के चेक ने भगवानदास की मुश्किलें बढ़ाई, 90 हजार के लिए किया था आवेदन; पांच हजार मंजूर

Thu, 01 Aug 2024 12:49 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद मिलने का एक साल का इंंतजार खत्म हुआ तो मदद के नाम पर मिली पांच हजार का चेक लाभार्थी ई-रिक्शा चालक भगवानदास के लिए जी का जंजाल बन गया। पांच हजार का चेक मंजूर होने से झटका लगा तो तीन हजार रुपये की दलाली मांगी गई।
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अपनी पत्नी के साथ भगवानदास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद मिलने का एक साल का इंंतजार खत्म हुआ तो मदद के नाम पर मिली पांच हजार का चेक लाभार्थी ई-रिक्शा चालक भगवानदास के लिए जी का जंजाल बन गया। पांच हजार का चेक मंजूर होने से झटका लगा तो तीन हजार रुपये की मांगी गई दलाली ने भगवानदास की नींद उड़ा दी।

दलाली का मामला सुर्खियां बनी तो तहसील से आनन फानन में बिना तारीख का चेक थमा दिया गया। यही नहीं थाना, तहसील के चक्कर लगाते परेशान भगवानदास को अदालत में भी जाना पड़ा। तहसील प्रशासन से सही चेक भगवानदास को मिल गया है, लेकिन इतने झटकों ने उसे तोड़कर रख दिया है। वे चेक को लौटाने की बात कह रहे हैं।

चार दिनों से रुद्रपुर के सियासी प्रतिद्वंद्वियों के केंद्र पर रहे भगवानदास की कहानी दर्दभरी है। किराये के मकान में भरे पूरे परिवार के साथ मुफिलिसी में दिन काटने वाले भगवानदास एक साल पहले हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके इलाज में दो लाख रुपये से अधिक खर्च हुए और इलाज कराने में मकान भी बिक गया। भगवानदास की पत्नी आशा देवी मुख्यमंत्री राहत कोष में इलाज के लिए 90 हजार के बिल के साथ आवेदन किया था। एक साल से राहत राशि का इंतजार के बाद आशा देवी के नाम पर पांच हजार की धनराशि मंजूर हुई थी। इस चेक को लेने के लिए पहले वे परेशान हुई और फिर चेक मिलने के बाद परेशानी दोगुनी हो गई।

बुधवार की दोपहर पत्नी आशा देवी के साथ तहसील में आए भगवानदास कहते हैं कि चेक उनके लिए आफत बन गया है। तहसीलदार दिनेश कुटौला ने बताया कि बुधवार को अपरान्ह में लाभार्थी को तहसील से चेक दे दिया गया है और इसकी रिसिविंग भी ले ली गई है।

गरीबी पर भी कसे गए तंज

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300 रुपये किराए पर ई रिक्शा चलाने वाले भगवानदास को लेकर विधायक और पूर्व विधायक ने सियासी दुश्मनी भी भरपूर निभाई। भगवानदास को हथियार बनाकर एक दूसरे पर बिना नाम लिए खूब सियासी हमले किए। यही नहीं उसकी उसकी गरीबी पर खूब तंज किया गया। भगवानदास कहते हैं कि गरीबी का मजाक बनाने वाले नेताओं को उसकी माली हालत भी देखनी चाहिए थी। 

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