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दो बच्चियों की मौत के जख्म पर 500 रुपये का मरहम

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खटीमा नागरिक चिकित्सालय - फोटो : KHATIMA
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खटीमा। दो बच्चियों की जापानी बुखार से हुई मौत के बाद शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि परिजनों की सुध लेने तक नहीं पहुंचे। दो बच्चियों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ दो बच्चियों की मौत से सदमे में आए बलुआ बगुलिया के सुनील कुमार ने बताया कि उसके घर पर हल्का पटवारी नेकराम आए थे। वह सांत्वना के नाम पर 500 रुपये, 2 किलो चावल, 5 किलो आटा, एक किलो नमक तथा मिर्च-मसाला एवं सैनिटाइजर की शीशी दे गए। पीड़ित परिवार ने बताया कि वह उनकी फोटो भी खींच कर ले गए। इधर, प्रभारी तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल प्रशासन के पास पीड़ित परिवार की सहायता के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है। सीएम राहत कोष से पीड़ित परिवार की मदद हो सकती है।
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विधायक धामी ने स्वास्थ्य सचिव को भेजा पत्र
खटीमा। विधायक पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति से अवगत कराया गया है। सचिव से इस बीमारी का उचित इलाज क्षेत्र में ही करवाने की व्यवस्था करने की अपील की है।
ग्राम सभाओं में कराया जा रहा है सर्वे
खटीमा। नागरिक अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा नेगी ने बताया कि ब्लॉक की 64 ग्राम सभाओं में सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में 15 साल से कम उम्र के बच्चों खासतौर पर बाहर से आकर बसे परिवारों के बच्चों पर नजर रखी जा रही है। सर्वे कर टीके से वंचितों को टीके लगाए जाएंगे। इधर, ग्राम कुटरी में आशा कार्यकर्ता कमला गैड़ा ने घर-घर जाकर सर्वे शुरू किया और टीके से वंचित बच्चों को एएनएम सेंटर पहुंचकर टीका लगाने के लिए प्रेरित किया है।
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डीडीटी का नहीं हो रहा है छिड़काव
खटीमा। अमाऊं के रहने वाले उम्मेद सिंह गैड़ा उर्फ हेड साहब बताते हैं कि 1970 के दशक तक मलेरिया विभाग की टीम घर-घर जाकर डीडीटी पाउडर का घोल बनाकर छिड़कती थी। तब किसी तरह की बीमारियां नहीं होती थीं। इसके बाद क्षेत्र में कभी डीडीटी का छिड़काव नहीं किया गया। ग्राम नौगवांठग्गू निवासी माधवानंद जोशी भी दवा के छिड़काव की याद को ताजा करते हुए कहते हैं कि मच्छर जनित रोगों पर विराम सा लगा रहता था। इधर, दवा छिड़काव बंद होने से तरह-तरह की बीमारियां फैलने लगी हैं। ग्राम अमाऊं निवासी खीमा अधिकारी ने बताया कि पूर्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर डीडीटी का घोल बनाकर छिड़कती थी। तब मच्छर जनित बीमारियां नहीं होती थीं। नेपाल से लगे ग्राम बलुवा खैरानी निवासी शिव प्रसाद ने बताया 1975 के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम डीडीटी का घोल छिड़कती थी।
हर साल मिलता है दस हजार रुपये का बजट
खटीमा। ग्राम पंचायत नदन्ना की ग्राम प्रधान माया जोशी बताती हैं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत सदस्य और सचिव आशा कार्यकर्ता होती है। इस बजट का उपयोग कीटनाशक के छिड़काव और सफाई के लिए होता है। प्रतिवर्ष मिलने वाले 10हजार के बजट की मॉनिटरिंग ग्राम समिति करती है।
नागरिक अस्पताल बना रेफरल सेंटर
खटीमा। करोड़ों रुपये खर्च कर 2018 में बना 100 बेड का नागरिक अस्पताल डॉक्टरों के अभाव में महज रेफरल सेंटर बनकर रह गया। सर्जन एवं फिजीशियन के अभाव में यहां पर दो साल में एक भी आपरेशन नहीं हुआ है।
अस्पताल के रिकार्ड बताते हैं कि दो वर्ष के दौरान चार-पांच माह के लिए एक सर्जन डॉ. मयंक कश्मीरा तैनात रहे। सहयोग न मिल पाने के कारण वह इस अस्पताल में काम नहीं कर सके। वैसे अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं बेहोशी के डॉक्टर हैं लेकिन ऑपरेशन कक्ष में आज तक कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं हो सका है।
0 मैं यहां पर कुछ महीनों पहले ही आई हूं। पहले ऑपरेशन हुए होंगे, इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं है। मेरा प्रयास है कि अस्पताल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। चंपावत की तर्ज पर यहां ब्लड बैंक भी स्थापित होगा। - डॉ. सुषमा नेगी, सीएमएस नागरिक अस्पताल
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