डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव ने रानीचौरी नर्सरी, क्रू-स्टेशन और कौड़िया में इको टूरिज्म कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। उन्होंने नर्सरी में उगाए जा रहे पौधों की जानकारी लेते हुए जंगली जानवरों को आबादी में आने से रोकने के लिए अधिक से अधिक बागवानी की पौध तैयार करने के निर्देश दिए।
बृहस्पतिवार को डीएम ने वन विभाग के कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान रेंजर आशीष डिमरी ने बताया कि नर्सरी में स्थानीय फलों के पौध तैयार की जा रही है। इस दौरान डीएम ने रानीचौरी में वनाग्रि की सूचनाएं आदान-प्रदान करने के लिए बनाए गए क्रू-स्टेशन का निरीक्षण भी किया। उन्होंने वन विभाग को फायर सीजन को देखते हुए निरंतर गश्त कराने के निर्देश दिए। उसके बाद उन्होंने ठांगधार क्षेत्र में जिला प्लान के तहत पर्यटन विकास मद में कराए जा रहे कार्यों में कौड़िया गेट, चौकी, साइकिल पार्क, 3.75 किमी लंबा साइकिल ट्रेक, व्यू प्वाइंट आदि का निरीक्षण किया। इस मौके पर डीएफओ वीके सिंह, डिप्टी रेंजर शशि भूषण उनियाल, ओपी कुकरेती और नीलम आदि मौजूद थे।
उधर, रुद्रप्रयाग में
पौड़ी जिले में बनाए 260 क्रू स्टेशन
पौड़ी। वन विभाग ने वनाग्नि सुरक्षा के लिए जिले में 260 क्रू स्टेशन बनाए हैं। वनाग्नि की निगरानी के जिलए 8 मास्टर कंट्रोल रुम और 129 बेस स्टेशन बनाए गए हैं। डीएफओ ने कहा कि जिले में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
वनाग्नि सुरक्षा को लेकर हुई समीक्षा बैठक में डीएम डा. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि वनाग्नि से वन संपदा हीं नष्ट नहीं होती, बल्कि अनेक जीव अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं। डीएफओ गढ़वाल मुकेश कुमार ने बताया कि जिले में वनाग्नि की वार्षिक वनाग्नि नियंत्रण औसत 36707.88 हेक्टेयर है। इस अवसर पर सीडीओ प्रशांत कुमार आर्य, डीएफओ सिविल एवं सोयम सोहन लाल, लैंसडौन अमरेश कुमार, डीडीओ पौड़ी पुष्पेंद्र चौहान, एसडीओ वन विभाग राजेंद्र रावत, सीओ सदर प्रेम लाल टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी, ईओ नगर पालिका प्रदीप बिष्ट आदि मौजूद रहे। संवाद
वनाग्नि नियंत्रण को बने वन अग्नि अनुसंधान संस्थान
रुद्रप्रयाग। वनाग्नि से जैव विविधता और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम से कम करने के लिए राष्ट्रीन वन अग्नि अनुसंधान संस्थान की स्थापना की मांग उठने लगी है। अगस्त्यमुनि विकासखंड के ग्राम पंचायत मरोड़ा के वन पंचायत सरपंच देवी प्रसाद थपलियाल ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर जंगलों की आग को लेकर गंभीर चिंतन पर जोर दिया है। कहना है कि उत्तराखंड सहित देश के अन्य कई राज्यों में प्रतिवर्ष जंगलों में आग लगना, पिछले कुछ वर्षों से आम हो गया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर वन अग्नि अनुसंधान संस्थान की स्थापना की मांग की है। संवाद
टिहरी वन रेंज के चापड़ा में वनाग्नि रोकने को जानकारी देते कर्मी।- फोटो : NEW TEHRI