बालगंगा और धर्मगंगा के संगम पर आस्था पथ का अभाव बूढ़ाकेदार के भक्तों की राह में बाधा बन रहा है। आस्था पथ और संगम पर घाट निर्माण के लिए सिंचाई विभाग ने गत वर्ष अक्तूबर में शासन को आठ करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन निर्माण के लिए एक धेला तक नहीं मिला। ऐसे में संगम तट पर रास्ता और अन्य सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को बूढ़ाकेदार मंदिर पहुंचने में दिक्कत हो रही है।
जिले में बूढ़ाकेदार प्राचीन मंदिर है। यहां पर बालगंगा व धर्मगंगा नदी का संगम है। पूर्व में केदारनाथ पैदल यात्रा का यह मुख्य पड़ाव था। श्रावण मास में हर सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए मंदिर में आते हैं, लेकिन संगम पर आस्था पथ नहीं होने से भक्तों को दिक्कत होती है। बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी, धीरेंद्र नौटियाल व सुशील सेमवाल का कहना है कि संगम तट तक पहुंचने के लिए सही रास्ता नहीं बना है। पूर्व में सिंचाई विभाग ने सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया था, लेकिन 2013 की आपदा में वह बह गई।
नमामि गंगे योजना के तहत बूढ़ाकेदार में बालगंगा और धर्मगंगा के संगम पर आस्था पथ और घाट निर्माण के लिए शासन को गत वर्ष आठ करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है। बजट मिलने पर ही नदी किनारे सुरक्षा दीवार निर्माण किया जाएगा।
- बिजेंद्र कुमार, ईई सिंचाई विभाग टिहरी।