रविवार को सामने आए स्टिंग से कांग्रेस के पैरों तले जमीन खिसकती जा रही है। स्टिंग में कांग्रेस के दो नेताओं के बीच की बातचीत कांग्रेस की अंदरूनी सियासत पर गंभीर सवाल उठा रही है।
कांग्रेस की चिंता भी इस बात को लेकर है कि यह मामला कांग्रेस को चुनाव में नुकसान पहुंचा सकता है। अब चिंता इस बात की भी है कि कहीं यह प्रकरण फ्लोर टेस्ट को प्रभावित न करें। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि जिस तरह से दो स्टिंग सामने आए हैं, उससे इतना जरूर होगा कि प्रदेश में राजनेताओं से लोगों का विश्वास उठेगा।
2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी विधायकों की खरीद फरोख्त की बात सामने आई थी। लेकिन, उस समय इन मामलों ने इतना तूल नहीं पकड़ा था। अब कांग्रेस के विधायक मदन बिष्ट और पूर्व मंत्री हरक सिंह की बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस के विधायकों और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के रिश्तों को तार-तार करने का काम भी यह बातचीत कर रही है।
कांग्रेस भले ही इस स्टिंग से कांग्रेस के विधायकों पर असर न पड़ने और फ्लोर टेस्ट प्रभावित न होने की बात कर रही हो, लेकिन यह साफ है कि फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस में दबाव की राजनीति भी सर उठा सकती है। बसपा और कांग्रेस के कुछ विधायकों के पाला बदलने की कुछ चर्चाओं के पीछे भी इसी दबाव की राजनीति का हाथ बताया जा रहा है।
यह लोग ये नहीं समझ रहे हैं कि प्रदेश की राजनीति का चेहरा इन लोगों ने कितना बिगाड़ दिया है। जैसे नागिन अपने बच्चों को ही खा जाती है, ठीक वैसे ही ये भविष्य की राजनीति को खत्म कर रहे हैं। कांग्रेस का जितना कुनबा बचा है वह इस ओछी राजनीति से दूर है।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष