जल संकट के प्रति राज्यों एवं केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके इसके लिए जल सत्याग्रह शुरू किया गया है। मैग्सैसे अवार्ड विजेता एवं स्टॉकहोम जल पुरस्कार से पुरस्कृत राजेंद्र सिंह ने कहा उत्तराखंड में बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के बजाए छोटी परियोजनाओं से समृद्धि का रास्ता खुल सकता है।
इससे नदियों की अविरलता और निर्मलता भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि सूखा और जल संकट के प्रति राज्यों एवं केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके इसके लिए जल सत्याग्रह शुरू किया गया है।
प्रेस क्लब में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि बिहार के चंपारण से 17 अप्रैल से जल सत्याग्रह शुरू किया गया है। इसका दूसरा चरण पांच जून से 20 जून तक चलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कई छोटी नदियां पूरी तरह से सूख चुकी हैं।
जल सुरक्षा कानून लागू हो
बारिश जितनी पहले होती थी अब भी उतनी हो रही हैं, लेकिन बाढ़ और सूखा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और सरकारों को जल निकायों पर अवैध अतिक्रमण, भूजल के अनियोजित दोहन और जल प्रदूषण से संबंधित मामलों में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि जल साक्षरता को देश भर में बढ़ावा दिया जाए और जल सुरक्षा कानून लागू हो।
उन्होंने कहा कि देश में पानी का व्यवसाय 50 हजार करोड़ का है। कंपनियां जल स्रोतों को गंदा करने का काम कर रही हैं ताकि पानी का बाजार बढ़े। पत्रकार वार्ता के दौरान संजय जैन, अमित अहलूवालिया, रविंद्र एस नेगी, हिमांश सिंह आदि मौजूद रहे।