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लोक संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं को संग्रहित कर रहीं शिक्षिका

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पहाड़ के प्राचीन वाद्य यंत्र, जिसमें अधिकांश गुमनाम हो गए हैं। - फोटो : RUDRAPRYAG
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राजकीय इंटर कॉलेज मणिपुर में कार्यरत शिक्षिका ललिता रौतेला लोक संस्कृति और मानव जीवन की दिनचर्या से जुड़ी पौराणिक वस्तुओं को संजोने में जुटी है। उन्होंने विद्यालय के छात्र-छात्राओं के सहयोग से कई गांवों से प्राचीन वाद्य यंत्र, दैनिक उपयोग में आने वाले तांबे, पीतल, कांसे के बर्तन, पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली सामग्री, अनाज नापने व अनाज पीसने व कूटने के यंत्र/उपकरणों को संग्रह किया है।
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शिक्षिका ललिता रौतेला आसपास के गांवों से स्कूली बच्चों के सहयोग से हुड़का, ढौंर-थाली, रणसिंहा, बिणई, मस्कबीन, अनाज नापने वाला पाथा व तामी, अनाज पीसने के लिए जंदरा (पत्थर के दो पाटों से बनी हाथचक्की), रिंगाल की सूप, छाबड़ा, तमली (तांबे की सुराही), तोमड़ी (बीज रखने के लिए सूखी लौकी), कांसे के लोटे, गिलास, पितल के बंठा (पानी भरने का वर्तन), नौगर्या (नौ ग्रह पूजन के लिए लकड़ी का बना होता है।), लकड़ी की परोठी (घरों में दही रखने का वर्तन), लालटेन, कांसे के भड्डू, बैलों के गले में बांधने वाले खांकर आदि कई वस्तुओं को एकत्रित कर रही हैं। किस गांव से किस परिवार के पास से कौन से वस्तु है, उसके लिए रजिस्टर बनाया गया है।
प्राचीन वस्तुओं को एकत्र कर उन्हें संग्राहलय में स्थान दिया जा सकता है। ये वस्तुएं पूर्व में हमारे जीवन का अहम हिस्सा रही हैं, जिन्हें संरक्षित करने के लिए जीआईसी मणिपुर में शिक्षिका रौतेला व छात्र-छात्राओं की पहल स्वागतयोग्य है। उनके द्वारा कई प्राचीन वाद्य यंत्र संजोए गए हैं, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं।
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- मनोज रावत, विधायक केदारनाथ
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