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जलप्रलय के बाद नौ वर्ष बाद नए रूप में नजर आने लगी केदारपुरी

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जलप्रलय के वर्षों बाद केदारपुरी नए रूप में नजर आने लगी है। मंदिर परिसर से मार्ग पर धाम की भव्यता यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं का मन मोह रही है। इस वर्ष बाबा केदार के दर्शनों को पहुंच रहे श्रद्धालु धाम में आदिगुरु शंकराचार्य समाधिस्थल के दर्शन भी कर रहे हैं।
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16/17 जून 2013 की आपदा ने केदारनाथ का भूगोल बदलकर रख दिया था। मंदिर को बचाने वाली दिव्य शिला से अनुमान लगाया जा सकता है, तब केदारनाथ के हालात कैसे रहे होंगे। मार्च 2014 से तत्कालीन प्रदेश सरकार ने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) को धाम तक पहुंच और सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। निम ने रामबाड़ा से केदारनाथ तक नया पहुंच मार्ग बनाया। साथ ही केदारनाथ मंदिर व केदारपुरी को किसी भी प्रकार की आपदा से बचाने के लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण किया, जिसमें विदेशी तकनीकी का उपयोग किया गया।
अक्तूबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ पुनर्निर्माण को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया, जिसके बाद यहां निर्माण कार्यों को गति मिली। एक तरफ जहां मंदिर परिसर व मंदिर मार्ग का विस्तार कर उसे नया रूप दिया गया, वहीं मंदिर के पीछे शंकराचार्य की समाधिस्थल का पुनर्निर्माण भी हो चुका है। केदारनाथ में सरस्वती नदी किनारे 504 मीटर लंबा आस्था पथ भी बनाया गया, जिस पर चार तर्पण कुंड व घाट भी बनाए गए हैं। तीन चरणों में चल रहे पुनर्निर्माण के तहत दूसरे चरण के काम इन दिनों जोरों पर है, जिसमें अस्पताल, पुलिस थाना, यात्रा कमांड एंड कंट्रोल रूम सहित आवासीय भवन बनाए जा रहे हैं।
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आठ वर्ष बाद गरूड़चट्टी से जुड़ा केदारनाथ
16/17 जून 2013 में मंदाकिनी नदी के सैलाब से केदारनाथ में पुल बहने और रामबाड़ा के तबाह होने के बाद गरूड़चट्टी का केदारनाथ से संपर्क कटा हुआ था, लेकिन इस वर्ष मंदाकिनी नदी पर स्टील गार्डर पुल बनकर तैयार हो गया है। जिससे केदारनाथ से गरूड़चट्टी का सीधा संपर्क हो गया है। इस यात्राकाल में कई यात्री गरूड़चट्टी के प्राचीन मठ-मंदिरों के दर्शन को पहुंच रहे हैं।
ध्यान गुफा बनी मुख्य आकर्षण
पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ में निर्मित ध्यान गुफा बीते चार वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वर्ष 2019 में यहां यात्राकाल में स्वयं पीएम ने 17 घंटे साधना की थी। साथ ही पूरे सीजन में 95 श्रद्धालु ने योग व ध्यान किया था। वर्ष 2020 व 21 में भी ध्यान गुफा श्रद्धालु की पहली पसंद रही, जबकि इस वर्ष आगामी 30 जून तक बुकिंग फुल है।
पहाड़ी शैली में बन रहे तीर्थपुरोहितों के मकान
केदारनाथ में प्रभावित हुए तीर्थपुरोहितों के लिए पहाड़ी शैली में आवासीय भवन बनाए जा रहे हैं। 2015/16 में शासन द्वारा जिन तीर्थपुरोहितों के भवन, भूमि केदारनाथ पुनर्निर्माण में अधिग्रहित की गई हैं, उनके लिए अनुबंध के तहत आवासीय भवन बनाए जा रहे हैं। अभी तक यहां 48 भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है।
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