नगर की 20 हजार आबादी की शुद्ध जलापूर्ति की उम्मीदों पर वन अधिनियम के पेंच ने पानी फेर दिया है। नगर के लिए पुनाड़ गदेरा-रुद्रप्रयाग पेयजल योजना से जलापूर्ति हो रही है। जिसके स्रोत पर 51 लाख 23 हजार, 250 लीटर जल शोधन क्षमता का फिल्टर प्लांट बनना है, लेकिन प्लांट का कार्य भूमि हस्तांतरण नहीं होने से बंद पड़ा है।
नगर के लिए एकमात्र पेयजल योजना पुनाड़ गदेरा से जलापूर्ति हो रही है, लेकिन एक दशक पूर्व में 91 लाख की लागत से बना फिल्टर बीते आठ वर्ष से शोपीश बना है, जिससे लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। समस्या से निजात पाने के लिए तीन वर्ष पूर्व जलसंस्थान ने 2050 तक बढ़ती आबादी के हिसाब से पेयजल योजना पर फिल्टर प्लांट की योजना तैयार कर शासन को भेजी थी। योजना निर्माण के लिए 3.50 करोड़ मंजूर हो चुके हैं। बीते वर्ष सितंबर-अक्तूबर में जलनिगम ने पेयजल योजना के स्रोत सुजगीबगड़ के समीप 5.12 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) फिल्टर प्लांट निर्माण के लिए मशीन से समतलीकरण कार्य किया। इसके बाद यहां प्लांट के निर्माण से संबंधित कुछ सामग्री भी भेजी गई, लेकिन रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने यह कहकर काम रुकवा दिया कि भूमि हस्तांतरण नहीं हो रखा है। अब, बीते पांच माह से काम बंद पड़ा है।
इधर, व्यापार संघ अध्यक्ष चंद्रमोहन सेमवाल, हरी सिंह बिष्ट, सुरेंद्र कप्रवाण, महेंद्र सिंह बिष्ट, जिपं सदस्य नरेंद्र रावत, सभासद लक्ष्मण कप्रवाण, सुरेंद्र रावत, अनूप सेमवाल, सुरेंद्र कप्रवाण, महेंद्र सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि जिला प्रशासन से मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड जलनिगम के अधिशासी अभियंता नवल कुमार ने बताया कि वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई है, लेकिन वन विभाग के प्रभागीय स्तर से काम को रोका गया है। इधर, वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, जिससे काम रोका गया है।
जिले के 35 फीसदी गांवों में गहराया पेयजल संकट
जिले में 35 फीसदी गांवों में पानी का संकट बना हुआ है, जबकि जल संस्थान के 28 स्रोतों पर 75 फीसदी पानी कम हो चुका है।
नगर क्षेत्र को पुनाड़ गदेरा से पानी की सप्लाई होती है, लेकिन यहां भी पानी कम हो गया है। जिससे रात को पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। वहीं, दिन में भी नगर के कई क्षेत्रों में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो रही है। उधर, तिलवाड़ा और सुमाड़ी में सप्ताह में एक या दो दिन पानी की सप्लाई हो रही है। तल्लानागपुर के बोरा, दुर्गाधार, चोपता में कई दिनों से पेयजल सप्लाई ठप है। वहीं, गुप्तकाशी में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने से लोग विश्वनाथ मंदिर में बह रही गंगा-यमुना की जल धाराओं से अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। जखोली ब्लॉक के 30 से अधिक ग्राम पंचायतों के ग्रामीण पानी के लिए तड़के से देर रात्रि तक दूरस्थ स्रोतों की दौड़ लगा रहे हैं। जल संस्थान के ईई संजय सिंह का कहना है कि सड़क से लगे पेयजल संकटग्रस्त कस्बों व गांवों में टैंकर से जलापूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। संवाद