उत्तराखंड में आरटीआई कार्यकर्ता माफिया के निशाने पर हैं। राज्य में सरेआम दो आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या होने से आरटीआई कार्यकर्ताओं में खौफ है।
हरिद्वार जिले में आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश चौहान और काशीपुर में आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार रहेजा का मुख्य बाजार में सरेआम गोली मारकर कत्ल के बाद एक और आरटीआई कार्यकर्ता ने खुद को असुरक्षित बताकर प्रधानमंत्री को खत लिखा है।
नहीं हो रही सुरक्षा
उन्होंने सुरक्षा के इंतजाम करने के साथ-साथ यह भी मांग की है कि देश में आरटीआई कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिए ठोस कानून बनाया जाए।
रामनगर के आरटीआई कार्यकर्ता अजीम खान का कहना है कि अगर समय पर कानून बना दिया गया होता तो आज इस तरह सरेआम आरटीआई कार्यकर्ता नहीं मारे जाते।
माफिया के निशाने पर
उन्होंने कहा कि भू माफिया और बिल्डर उन्हें घर पर दो बार जान से मारने की धमकी दे चुके हैं क्योंकि उन्होंने आरटीआई से ही भ्रष्टाचार से जुड़ी और माफिया, बिल्डरों के गठजोड़ को साबित करने वाली सूचनाएं मांगी थी।
उत्तराखंड सूचना आयोग के हस्तक्षेप से धमकी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस ने एफआर लगा दी।
पुलिस का कहना था कि धमकी देने के संबंध में गवाह नहीं मिले।
आफत में आरटीआई कार्यकर्ता
पुलिस के अलावा राज्य सरकारें आरटीआई कार्यकर्ताओं के विषय में गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि या तो सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के कानून को बदल दिया जाए या फिर इस कानून को और मजबूत बनाया जाए जिससे आरटीआई कार्यकर्ताओं की जान बच सके।
2007 से अब तक देशभर में 151 धमकी उत्पीड़न और हत्या के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। वह खुद 2009 से आरटीआई कार्यकर्ता है, लेकिन आज तक सुरक्षा नहीं मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री से सुरक्षा की उम्मीद लगाई है।