कोतवाली और थानों में स्थापित की गई महिला हेल्प डेस्क बिखरने की कगार पर पहुंच गए परिवारों के चेहरों पर खुशियां लौटा रही है। महिला हेल्प डेस्क पर दंपती को परिवार टूटने के बाद बच्चों और खुद पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की बारीकि से जानकारी दी जा रही है, जिसके बाद दंपती रिश्ता तोड़ने की बजाए जोड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं। रुड़की और देहात की बात करें तो महिला हेल्प डेस्क टूटने की कगार पर पहुंचे करीब 82 परिवारों को बचा चुकी है।
डीजीपी अशोक कुमार की ओर से प्रदेश भर में सभी थानों और कोतवाली में कुछ माह पूर्व महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई थीं। महिला हेल्प डेस्क स्थापित करने के पीछे मंशा थी कि महिलाओं को त्वरित इंसाफ मिल सके। साथ ही टूटने की कगार पर पहुंच चुके रिश्तों को जोड़ा सके। महिला हेल्प डेस्क के आंकड़ों पर गौर करें तो परिणाम सुखद अहसास करा रहे हैं। दरअसल, रुड़की और देहात की बात करें तो पिछले छह माह में महिला हेल्प डेस्क 82 से अधिक परिवारों को टूटने से बचा चुकी हैं। यह वह परिवार हैं, जो दहेज उत्पीड़न के चलते तलाक लेने तक पहुंच चुके थे। इतना ही नहीं दहेज उत्पीड़न को लेकर केस दर्ज करवाने की तैयारी तक हो चुकी थी। लेकिन महिला हेल्प डेस्क की मुहिम के चलते इनके चेहरों पर फिर से खुशी आ गई है।
पिछले छह माह में सुलझे मामले -
सिविल लाइंस कोतवाली - 13
गंगनहर कोतवाली -11
मंगलौर कोतवाली - 14
लक्सर कोतवाली - 11
भगवानपुर थाना - 09
बुग्गावाला थाना - 08
पिरान कलियर थाना -08
खानपुर थाना -09
झबरेड़ा थाना -10
छोटी-मोटी तकरारों की करें अनदेखी
महिला हेल्प डेस्क पर मनमुटाव के बाद आने वाले दंपतियों को पुलिस की ओर से बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी दी जाती है। बताया जाता है कि छोटी मोटी तकरारों को अनदेखा करना चाहिए। छोटी मोटी तकरारें बड़ा रूप ले लेती हैं, जिससे बच्चों के भविष्य पर गलत असर पड़ता है। बच्चे मानसिक बोझ झेलते हैं और गलत राह पर निकल जाते हैं। इसलिए बच्चों के भविष्य के लिए रिश्ता तोड़ना नहीं, बल्कि मजबूत करना चाहिए। काउंसलिंग के बाद कई दंपती समझ जाते हैं और वह एक साथ रहने के लिए तैयार हो जाते हैं।
महिला हेल्प डेस्क पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। जो दंपती आते हैं, उन्हें समझाया जाता है, ताकि रिश्ता टूटने की बजाए जुड़ सके। कई मामलों में महिला हेल्प डेस्क ने टूटते परिवारों को जोड़कर खुशियां लौटाई हैं, जो कि सुखद परिणाम हैं। - प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसपी देहात