भाई दूज का पर्व शनिवार को रुड़की, लक्सर और देहात में धूमधाम से मनाया गया। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगी। वहीं, दिनभर बहनें भाइयों तो भाई बहनों के घर पहुंचते रहे। इस दौरान नन्हें मुन्ने बच्चों ने भी भाई दूज का पर्व मनाया।
दीपावली के साथ ही भाई-बहन के पावन प्रेम का प्रतीक यम द्वितीया का अपना विशेष महत्व है। बहनें भाई की मंगल कामना कर अपने को धन्य मानती हैं। भैया दूज हिंदू समाज में भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक है। बहनें अपने भाई की दीर्घायु व सुख समृद्धि की कामना करती हैं तो वहीं भाई भी शगुन के रूप में अपनी बहन को उपहार स्वरूप कुछ भेंट देते हैं। शनिवार को सुबह से ही रुड़की, लक्सर, भगवानपुर, झबरेड़ा, कलियर, मंगलौर और नारसन क्षेत्रों में बहनेें और भाइयों का एक-दूसरे के घर आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया। बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर भाई दूज का पर्व मनाया और उनके दीर्घायु की कामना की। वहीं, बाजारों में बहनों को गिफ्ट देने के लिए भाइयों की भीड़ लगी रही। किसी ने बहन को चॉकलेट, कपड़े तो किसी ने मोबाइल गिफ्ट किया। इस बीच छोटे-छोटे बच्चों ने भी धूमधाम से भाई दूज का पर्व मनाया। भैया दूज के पर्व पर रुड़की, लक्सर, कलियर, मंगलौर, नारसन, खानपुर, झबरेड़ा और भगवानपुर समेत सभी मुख्य और संपर्क मार्गों पर वाहनों की भारी भीड़ रही।
बहनों ने व्रत रखा
बहनों ने व्रत रखकर अपने भैया के लिए मंगलकामना की भगवान से कामना की। लक्सर कस्बे सहित खानपुर, सुल्तानपुर, रायसी ग्रामीण क्षेत्रों में पूरा दिन लोगों की चहल-पहल दिखी। भाई दूज को लेकर छोटे बच्चों में भी खूब उत्साह रहा। सुबह से ट्रेनों से यात्रा करने के लिए लोग रेलवे स्टेशन पहुंचे। कस्बे के बस अड्डों में भी अधिक भीड़ दिखी।
धूमधाम से मनाया भाई दूज का त्योहार
खानपुर। भाई दूज का त्योहार कस्बे में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने शुभ मुहूर्त में कलाई पर डोरी बांधकर और तिलक कर भाई की लंबी उम्र की कामना की। प्रह्लादपुर श्री दुर्गा माता मंदिर के पुजारी विनोद शर्मा ने बताया कि मान्यता के अनुसार यमराज ने कार्तिक मास की दूज पर अपनी बहन के घर जाकर हाथ पर डोरी बंधवाकर और मस्तक पर तिलक करवाकर उसके घर का भोजन किया था। तृप्त होकर यमराज ने अपनी बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा था। इस पर यमुना ने वरदान मांगा था कि जो भाई कार्तिक मास की दूज पर अपनी बहन के घर जाकर अपनी कलाई पर डोरी बंधवाकर और तिलक करवाकर उसके घर का भोजन करे, उसे यमराज का डर न सताए। इस पर यमराज ने वरदान देकर विदा ली थी। तभी से यह त्योहार मनाया जाता है।