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लागत कम करने को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का करें इस्तेमाल

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केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की के वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बनने वाले भवनों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग करने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि इससे लागत कम आएगी। साथ ही उन्होेंने भवनों में ऊर्जा दक्षता, आपदा प्रतिरोधकता और पर्यावरण संरक्षण के लिए तकनीक का इस्तेमाल किए जाने पर जोर दिया।
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सीबीआरआई में सोमवार को दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसका शुभारंभ करते हुए वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि सीबीआरआई ने ग्रामीण आवासों के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है। लोगों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुसार आवासों का निर्माण होना चाहिए। इनके निर्माण में स्थानीय सामग्रियों का इस्तेमाल होना चाहिए ताकि इनकी लागत अधिक न आए।
इंजीनियरों को बहु-आयामी भवन निर्माण संकल्पना के तहत ऊर्ज दक्षता, आपदा प्रतिरोधकता, निरंतरता और पर्यावरण संरक्षण की तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पूर्व कार्यक्रम के समन्वयक एवं मुख्य वैज्ञानिक एसके नेगी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग उत्तरप्रदेश की सहायक आयुक्त सोनाली चोपड़ा ने भी विचार रखे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभाग कर रहे उत्तर प्रदेश के 15 सहायक इंजीनियरों को सीबीआरआई की ओर से जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. सुवीर सिंह, इंजीनियर आशीष पीप्पल, डॉ. पीसी थपलियाल, एचके जैन, नवीन निशांत, हरीश कुमार, सुखबीर सिंह, मेहर सिंह उपस्थित रहे। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने वाले वैज्ञानिकों में डॉ. अजय चौरसिया, आर्किटेक्ट नवीन निशांत, इंजीनियर इतरत अमीन सिद्दीकी, इंजीनियर एचके जैन, डॉ. पीके दास, इंजीनियर आशीष पीप्पल आदि शामिल रहे।
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