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बूंदाबांदी से मिली राहत और अंधड ने मचाई आफत

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रुड़की में शाम के समय आई आंधी में गंगनहर किनारे सड़क पर गिरे पेड़ को हटाते फायर कर्मी। - फोटो : ROORKEE
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शहर में शाम को हल्की बूंदाबांदी के बाद लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की ही थी कि आंधी चलने से शहर से लेकर देहात तक की बिजली गुल हो गई। कई जगह लाइनों पर पेड़ गिर गए वहीं चार जगह बिजली के खंभे भी टूट गए। ऐसे में शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली 33 केवीए लाइन भी बंद हो गई। इससे कई बिजलीघर बंद हो गए। देर रात तक ऊर्जा निगम के एसडीओ, जेई और कर्मचारी लाइनों को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
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बुधवार सुबह से ही बादल छाए हुए थे। शाम को करीब पांच बजे आसमान में काले बादल घिर आए और मौसम सुहावना हो गया। मौसम का लुत्फ उठाने के लिए लोग घरों की छत पर और गलियों में निकल आए। कुछ देर बाद आंधी चलने लगी। आंधी के कारण शहर से लेकर देहात तक की बिजली गुल हो गई। आंधी इतनी तेज थी कि डीएवी रोड, रामपुर, मलकपुर, चाट बाजार, एरिगेशन कालोनी, गंगनहर किनारा, कलियर, भौरी, भंगेड़ी समेत अधिकतर स्थानों पर लाइनों पर पेड़ टूटकर गिर गए। खंजरपुर, भंगेड़ी, दुर्गा कालोनी और मोहम्मदपुर पांडा में बिजली के चार पोल टूट गए। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। ऐसे में शहर की 33 केवीए की लाइन बंद हो गई। इससे शहर से लेकर देहात तक कई बिजलीघर और फीडर बंद हो गए।
बिजली गुल होते ही शहर से लेकर देहात तक अधिकारी और कर्मचारियों ने मॉनीटरिंग शुरू कर दी थी। कई इलाकों में जहां छोटे-मोटे फाल्ट थे उन्हें तुरंत ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया था। जहां खंभे टूट गए थे और लाइनों पर पेड़ गिर गए थे वहां कर्मचारियों ने पहले उन्हें हटाना शुरू किया। ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता राहुल जैन ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में कम समय के लिए बिजली सप्लाई बाधित हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में लाइनों पर पेड़ गिरने से ज्यादा दिक्कत आई। देर रात तक पूरे इलाके की बिजली सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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बागवानों को उठाना पड़ा नुकसान
बुधवार देर शाम क्षेत्र में अंधड़ चलने से सबसे अधिक नुकसान बागवानों को हुआ है। हरिद्वार में इस समय 6500 हेक्टेयर भूमि पर आम के बाग हैं। आंधी के कारण आम झड़ गए। उद्यान अधिकारियों का कहना है कि इस समय का फल अपनी पेड़ से पकड़ मजबूत बना रहा होता है। ऐसे में आंधी आने से फल टूट जाता है। इसलिए इस अंधड़ से बागवानों को ज्यादा नुकसान हुआ है। इस समय पेड़ से टूटे हुए फल का साइज बहुत छोटा होता है। ये किसी अन्य इस्तेमाल में भी नहीं आ पाता।
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