पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं बसपा के प्रदेश महामंत्री चौधरी राजेंद्र सिंह को हरिद्वार जिले में राजनीतिक ठिकाना नहीं मिल पाया है। बेहद चौंकाने वाले राजनीतिक घटनाक्रम के तहत पार्टी ने उन्हें उत्तराखंड बॉर्डर से सटी यूपी की देवबंद विधानसभा सीट से चुनाव में उतारने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि बसपा ने इस एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। इससे हरिद्वार में जिला पंचायत की राजनीति के समीकरण भी बदलेंगे।
किसी जमाने में बसपा सुप्रीमो मायावती के खासमखास रहे बसपा प्रदेश महामंत्री चौधरी राजेंद्र सिंह को पार्टी ने यूपी में चुनाव लड़ाने की तैैयारी कर ली है। उनका मूल गांव मिरगपुर भी देवबंद विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऐसे में अपनी बिरादरी के अलावा अल्पसंख्यकों के बीच पैठ रखने के चलते पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। मई 2016 में कांग्रेस में रहते हुए चौधरी राजेंद्र सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अपने भाई की पत्नी सविता चौधरी को दिलाने में कामयाब रहे थे। उस समय जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार बसपा के प्रत्याशी को बसपा हाईकमान ने सरेंडर करा दिया था। इसके चलते राजेंद्र सिंह का इस सीट पर दबदबा बन गया। बाद में भाजपा सरकार के चलते ज्यादा दिन तक उनकी कुर्सी सलामत नहीं रही और भाजपा के सुभाष वर्मा ने निर्वाचन प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष पद कब्जा लिया। इस बीच चौधरी राजेंद्र सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया।
लंबे समय से हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे चौधरी राजेंद्र सिंह को अब बसपा ने देवबंद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने की तैयारी की है। ऐसे में हरिद्वार जिला पंचायत की राजनीति में उनका कितना दखल रहेगा, यह देखने वाली बात है। जानकारों का कहना है कि देवबंद की सीट उत्तराखंड से लगी हुई है। ऐसे में उनका कद हरिद्वार की राजनीति में बढ़ेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी नए समीकरणों के साथ भाजपा और कांग्रेस को चुनौती मिलेगी। चौधरी राजेंद्र सिंह ने बताया कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें देवबंद विधानसभा से चुनाव लड़ने का आदेश दिया है। इसके बाद वे पूरी ताकत के साथ तैयारियों में जुट गए हैं। जिला पंचायत की राजनीति से उनका लंबा रिश्ता है, जो आने वाले दिनों में भी कायम रहेगा।