रुड़की। कोरोना की तीसरी लहर के बीच कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूल खोले जाने से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर असमंजस में हैं। वहीं निजी स्कूल प्रबंधक इस बात को लेकर संशय में हैं कि कक्षा छह से 12 तक के स्कूलों में ही छात्र संख्या 30 से 40 फीसदी है। यदि कक्षा एक से पांच तक स्कूल खोले जाते हैं तो संख्या न के बराबर होगी, जबकि स्कूल प्रबंधकों का स्कूल खोलने पर खर्चा बढ़ जाएगा।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर सरकार ने मार्च 2020 में कक्षा एक से 12वीं तक के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल बंद करवा दिए थे। इसके बाद संक्रमण के मामले कम होने पर दो अगस्त 2021 को कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खोलने के आदेश दे दिए थे। अब जबकि कोरोना के मामले धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, ऐसे में सरकार ने कक्षा एक से पांचवीं तक के भी स्कूल खोलने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार के इस आदेश के बाद शिक्षा संगठन तो खुश हैं, जबकि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। अभिभावक अपने बच्चों को कोरोना महामारी के डर से स्कूल भेजने को तैयार भी नहीं हैं। वहीं स्कूल नहीं भेजने पर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होने का भी डर सता रहा है। उधर, निजी स्कूल प्रबंधक कक्षा एक से पांचवीं तक स्कूल खोलने के मूड में नहीं लग रहे हैं क्योंकि शहर में अभी भी कुछ स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने कक्षा छह से 12 तक के स्कूल भी नहीं खोले हैं। जो स्कूल खुले हैं, उनमें भी छात्रों की संख्या 30 से 40 फीसदी ही है। ऐसे में उनका कहना है कि यदि वे एक से पांच तक स्कूल खोलते हैं तो बच्चे नहीं आएंगे। जबकि स्कूल खोलने में उन्हें स्टाफ से लेकर अन्य सभी व्यवस्था करने और कोरोना गाइडलाइन का पालन करने में काफी रुपये खर्च करने पड़ेंगे और स्कूल नहीं आने पर बच्चों के अभिभावक फीस नहीं देंगे। ऐसे में स्कूलों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाएगा।
स्कूल खोले जाएंगे या नहीं, इसको लेकर सभी स्कूल प्रबंधक और अभिभावकों की बैठक लेकर निर्णय लिया जाएगा। यदि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हुए तो स्कूल खोलने का कोई फायदा नहीं है। वैसे भी कक्षा छह से 12वीं तक की कक्षाओं में भी छात्र संख्या बहुत कम है।
-माला चौहान, कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई रुड़की जोन
शासन से स्कूल खोलने को लेकर पत्र प्राप्त हो गया है। सभी निजी और सरकारी विद्यालयों को खोलने के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी नियमों के अनुसार ही स्कूल खोले जाएंगे।
- श्रीकांत पुरोहित, बीईओ रुड़की
घबराएं नहीं अभिभावक, सरकार की पूरी तैयारी
आईएमए के रुड़की अध्यक्ष डॉ. विकास त्यागी ने कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खोले जाने पर अभिभावकों से अपील की है कि वे घबराए नहीं। कहा कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए सरकार की ओर से सभी तैयारियां पूरी हैं। वेंटिलेटर से लेकर अस्पताल खोलने और टीकाकरण सभी चरम पर हैं। ऐसे में अभिभावकों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। स्कूल नहीं खुलने से बच्चों का पढ़ाई से संबंधित बहुत नुकसान हो रहा है, इसलिए अभिभावक उन्हें स्कूल भेजना शुरू कर दें, क्योंकि तीसरी लहर आने की अभी आशंका जताई जा रही है। यह निश्चित नहीं है कि महामारी दोबारा आएगी ही।
बोले अभिभावक
घर रहकर पढ़ाई करने से बच्चों की आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही बच्चे मोबाइल के आदी बन रहे हैं। स्कूल खुलने पर बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा। हालांकि स्कूल प्रबंधकों को भी अपनी तैयारी करनी होगी।
-एडवोकेट सोमपाल, अभिभावक
सरकार एक ओर कोरोना की तीसरी लहर आने की बात कह रही है, जबकि दूसरी ओर कक्षा एक से पांचवीं तक स्कूल खोलने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। ऐसे में स्कूल खोले जाने से बच्चों में संक्रमण बढ़ने की आशंका है।
-रुचि सैनी, अभिभावक
स्वास्थ्य विभाग तीसरी लहर में सबसे ज्यादा छोटे बच्चों के प्रभावित होने का अंदेशा पहले ही जता चुका है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजने पर डर की स्थिति बनी हुई है। स्कूल भी बच्चों की जिम्मेदारी लेने से हाथ खींच लेते हैं।
-कल्पना सैनी, अभिभावक
डेढ़ साल से बच्चों के स्कूल बंद पड़े हैं, ऐसे में उनकी पढ़ाई का काफी नुकसान होगा। यदि बच्चों की नींव ही मजबूत नहीं होगी तो आगे चलकर उन्हें कठिनाई होगी। सरकार का स्कूल खोलने का फैसला बच्चों के हित में ही है।
-मोंटी राणा, अभिभावक
अभिभावकों में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर डर बना हुआ है। वहीं छोटे बच्चे अनजान होने के चलते एक-दूसरे के संपर्क में आ जाते हैं। इस लिहाज से बच्चों को स्कूल भेजते हुए कोरोना फैलने का डर बना हुआ है।
-प्रशांत शुक्ला, अभिभावक