रामनगर के लोग चार साल से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के पास बेकार पड़ी जमीन पर स्थानीय लोगों के लिए पार्क बनवाने की मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए क्षेत्रीय पार्षद से लेकर विधायक, एसडीएम, डीएम और सीएम तक गुहार लगा चुके हैं। अधिकतर अधिकारियों ने बेकार पड़ी भूमि पर पार्क बनाने की सहमति दे दी, लेकिन डायट की ओर से अनापत्ति पत्र नहीं दिए जाने से मामला अधर में लटका है।
रामनगर में डायट परिसर और उससे सटी काफी जमीन लंबे समय से खाली पड़ी है। जमीन पर लोगों ने कूड़ाघर बना लिया है। वहीं, झाड़ियां आदि उगने के चलते यहां शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। उधर, यहां के लोगों के पास बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए कोई पार्क नहीं है। ऐसे में वर्ष 2018 में रामनगर निवासी नवनीत कालरा, उदयमान कालरा, दशरथ अरोड़ा, रामचंद्र सेतिया, सरदार अमरजीत सिंह, दीपक बत्रा, अमन, जय सिंह, धर्मपाल मेंदीरत्ता, राजीव अरोड़ा, सुरेश भल्ला आदि ने क्षेत्रीय पार्षद के माध्यम से विधायक से मांग की थी कि डायट के पास पड़ी खाली सरकारी जमीन पर पार्क बनाने की अनुमति दी जाए।
लोगों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, डीएम और मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर बेकार जमीन पर पार्क बनवाने की मांग की थी। दो साल पहले सीएम के निर्देश पर डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे। उस दौरान जांच में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पाया था कि खाली जमीन पर पार्क बन सकता है, लेकिन इसके लिए डायट की ओर से अनापत्ति पत्र की जरूरत पड़ी। इसके बाद स्थानीय लोग डायट प्राचार्य से अनापत्ति पत्र देने की मांग को लेकर मिले। उस दौरान उन्होंने उच्चाधिकारियों से वार्ता कर पत्र जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ समय बाद उनका ट्रांसफर हो गया। तब से ये मामला अधर में लटका है। स्थानीय लोगों ने अब पत्र देकर डीएम से पार्क बनवाने की मांग की है। क्षेत्रीय पार्षद पंकज सतीजा ने बताया कि तहसील दिवस पर डीएम से रामनगर में पार्क बनवाने की मांग फिर उठाई गई। उन्होंने मामले में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।