रुड़की। छठ महापर्व के दूसरे दिन महिलाओं ने खरना का प्रसाद खाकर निर्जला व्रत रखना शुरू कर दिया है। हालांकि बहुत से लोग 10 नवंबर से निर्जला व्रत रखना शुरू करेंगे। वहीं शाम को श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पूजा की बेदी बनाकर उसे सजाना शुरू कर दिया है। शहर से लेकर कस्बों तक छठ पर्व अपनी छटा बिखेरने लगा है। पूर्वांचल का सबसे अहम महोत्सव छठ पर्व का सोमवार को नहाय खाय के साथ आगाज हो गया था।
छठ पर्व के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। इसके तहत खरना वाले दिन यानी मंगलवार को व्रती महिलाओं ने घर की साफ-सफाई कर सात्विक भोजन जैसे लौकी, चने की दाल आदि बनाई। दिनभर छठ मइया की पूजा पाठ कर महिलाओं ने शाम को गुड़ की खीर और लौकी का पकवान बनाया। वैसे तो खरना वाले दिन मिट्टी के चूल्हे पर खरना का प्रसाद बनाया जाता है। इसके पीछे मान्यता यह है कि मिट्टी का नया चूल्हा पूरा पवित्र होता है और खरना का प्रसाद पवित्र माना जाता है। हालांकि वर्तमान में शहरों में मिट्टी के चूल्हे नहीं मिल पाते तो श्रद्धालु घर के चूल्हे को ही साफ कर उस पर प्रसाद बनाते हैं। वहीं शाम को महिलाओं ने खरना का प्रसाद खाकर 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू किया। अब ये महिलाएं 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर ही इस व्रत को समाप्त करेंगी। मंगलवार शाम को गंगनहर घाटों पर पहुंचकर महिलाओं ने अपनी चयनित जगह पर पूजा की बेदी तैयार की। 10 नवंबर यानी तीसरे दिन श्रद्धालु इसी जगह पर पहुंचकर पूजा पाठ के बाद डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
यहां भी धूमधाम से मनाया गया खरना
लक्सर। शुगर मिल कॉलोनी में मंगलवार को महिलाओं ने खरना के साथ निर्जला व्रत रखकर पर्व की शुरुआत की। शुगर मिल कॉलोनी में रहने वाली महिलाएं संगीता, लवी, छाया और बॉबी आदि ने बताया कि नहाय-खाय के दिन व्रतियों का नियम-निष्ठा शुरू किया। परंपरा के अनुसार घर में एक स्थान पर मिट्टी का चूल्हा बनाया गया। पूरा भोजन वहंी बनता है। इस दौरान कद्दू की सब्जी बनाने का विशेष महत्व है। खरना के दिन छठ मइया के लिए प्रसाद के लिए चावल, दूध के पकवान बनाए गए। साथ ही फल, सब्जियों से पूजा की गई। गुड़ की खीर भी बनाई गई। पूजा पाठ कर मइया से परिवार में खुशहाली, बच्चों की दीर्घायु, सुख-शांति की कामनाएं की गई। 65 वर्षीय सुरेश देवी व मुकेश देवी ने बताया कि छठ पूजा करने से नि:संतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य संदीप भारद्वाज शास्त्री ने बताया कि छठ पूजा करने से सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए व्रत किया जाता है। महिलाएं मंगलवार को व्रत रखकर अब 36 घंटे बाद ही खोलेंगी।