शहर में शारदीय नवरात्रों की तैयारियां चरम पर हैं। मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है। इसको लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। बाजार में भी नवरात्रि की पूरी तैयारियां दिखाई दे रही हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए बाजार सामान से पटा पड़ा है। जगह-जगह स्टाल लगाकर लोग सामान बेच रहे हैं। वहीं अब श्राद्ध का अंतिम दिन शेष रह गया है। इसके बाद बाजार में खरीदारी शुरू हो जाएगी।
शारदीय नवरात्रि देवी दुर्गा को समर्पित है। इस साल नवरात्रि की शुरुआत सात अक्तूबर से होने जा रही है, जो 14 अक्तूबर तक चलेगी। इस साल चतुर्थी तिथि के क्षय होने के चलते नवरात्र आठ दिन के होंगे। नवरात्र में दिन के समय श्रद्धालु उपवास रखते हैं और माता के दर्शन के लिए मंदिरों में जाकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि में प्रतिपदा पर कलश स्थापना के बाद ही पूजा आरंभ होती है। कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री की जरूरत होती है। इसके लिए बाजार में तैयारियां जोरो पर चल रही है। शहर में जगह-जगह स्टॉल लगाकर दुकानदार पूजा की सामग्री और माता का शृंगार का सामान बेच रहे हैं। बुधवार को अमावस्या पितृ विसर्जन है। इसके बाद श्रद्धालु बाजार में खरीदारी जोरों पर शुरू कर देंगे।
कैसे करें क्लश स्थापना
पहले नवरात्र पर सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें।
कलश को अपने घर के पूजा घर में रखें और मिट्टी के घड़े के गले में एक पवित्र धागा बांध दें।
कलश को मिट्टी और अनाज के बीज की एक परत से भर दें।
दूसरे कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, गंध, अक्षत, दूर्वा घास और सिक्के डाल दें।
अब कलश के मुख पर एक नारियल रखें और उसे पत्तों से सजाएं।
मंत्रों का जाप करें और माता दुर्गा से नौ दिनों तक कलश को स्वीकार करने और निवास करने का अनुरोध करें।
वितृ विसर्जन पर बन रहा विशेष योग
आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस साल 11 वर्षों बाद पितृ विसर्जन अमावस्या पर गजच्छाया योग बन रहा है। यह योग सूर्य और चंद्रमा दोनों के एक ही नक्षत्र में रहने से बनता है। छह अक्तूबर को सूर्य और नक्षत्र एक साथ हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। इस योग में पितरो के निमित्त दान आदि करने का विशेष महत्व होता है। इस योग में किए गए श्राद्ध से 12 साल का पुण्य प्राप्त होता है।
इस बार आठ होंगे नवरात्र
आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस साल चतुर्थी तिथि का क्षय होने से नवरात्र आठ दिन के होंगे। नौ अक्तूबर को तृतीय एवं चतुर्थ का संयोग एक साथ पड़ेगा, इसलिए इस दिन चंद्रघंटा और कूष्मांडा माता की एक साथ आराधना की जाएगी। बताया कि श्राद्ध में एक तिथि बढ़ने से नवरात्र में एक तिथि घट गई है। इस नवरात्रि में डोली पर ही दुर्गा मां का आगमन और प्रस्थान होगा।