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हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे मासूम, अस्पताल में बढ़ी भीड़

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शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार होने से गर्मी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बच्चों के साथ ही बड़े-बुजुर्ग भी हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। इसके चलते सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सिविल अस्पताल में आए दिन 40 से अधिक बच्चे उल्टी और पेट में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। जबकि बड़े-बुजुर्गों की संख्या भी 60 पार कर रही है।
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भीषण गर्मी के कारण शहर के लोग सीजनल बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। हर साल मई-जून में तापमान 40 पार कर जाता है। साथ ही गर्म हवाएं चलनी शुरू हो जाती हैं। इससे लोग लू, उल्टी-दस्त, पेट दर्द के साथ ही हीट स्ट्रोक का शिकार होने लगते हैं। सिविल अस्पताल की ओपीडी में हर दिन हीट स्ट्रोक के मरीज आ रहे हैं। इसके चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हीट स्ट्रोक के सबसे अधिक शिकार छोटे बच्चे हो रहे हैं। सिविल अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ एके मिश्रा ने बताया कि बढ़ती गर्मी के चलते छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। बताया कि बच्चे को यदि लगातार उल्टी हो रही है और उसे पेट दर्द की शिकायत है तो से हीट स्ट्रोक के लक्षण है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक के मरीज एकाएक बढ़े हैं। अस्पताल की ओपीडी में करीब 60 मरीज उल्टी, दस्त, फीवर आदि की सीजनल बीमारियों के पहुंच रहे हैं।
क्या बरते सावधानियां
- चिलमिलानी धूप में बाहर निकलने से परहेज करें।
- धूप में निकलते समय सर को ढक्कर निकले।
- फुल आस्तीन के कपड़े पहन कर ही बाहर जाएं
- धूप से घर पहुंचने पर तुरंत पानी न पीये, थोड़ा रुककर पानी पीये।
- ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थों का इस्तेमाल करें।
- ओआरएस और ग्लूकोज का सेवन करें
- खाने में ज्यादा मसालेदार चीजों का इस्तेमाल करने से बचे।
अस्पताल के वार्ड में सभी बेड फुल
सिविल अस्पताल में इस समय 106 बेड की व्यवस्था है। अस्पताल में हर दिन दुर्घटना के अलावा प्रसव होने और विभिन्न मरीजों के ऑपरेशन होने के चलते 60 से 70 बेड फुल रहते हैं। इसके बाद करीब 30 बेड खाली रहते हैं, लेकिन वर्तमान में आए दिन 60 से अधिक मरीज हीट स्ट्रोक के पहुंच रहे हैं। इसमें से कुछ की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। इसके चलते इस समय अस्पताल के सभी 106 बेड फुल हैं। हांलाकि हर दिन आठ से दस मरीजों की स्वस्थ होने के बाद छुट्टी की जा रही है। ऐसे में मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है। सीएमएस डॉ संजय कंसल ने बताया कि फिलहाल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि ऐसी स्थिति न हीं है कि मरीजों को रेफर करना पड़े या उन्हें समुचित इलाज न मिल पाए।
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