टीकाकरण के महा अभियान को सफल बनाने में अब बस स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती महिलाओं का साथ चाहिए। गर्भवती महिलाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रम के चलते विभाग टीकाकरण अभियान को सौ फीसदी तक नहीं पहुंचा पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम और अधिकारियों के काफी प्रयासों के बावजूद कुछ प्रतिशत महिलाओं ने ही कोरोना वैक्सीन लगवाई है। हालांकि अभी भी रुड़की, नारसन, इमलीखेड़ा और भगवानपुर क्षेत्र में करीब 10 हजार गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं, जो वैक्सीन लगवाने से झिझक रही हैं।
टीकाकरण अभियान को सौ फीसदी करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई है। सरकार समय-समय पर टीकाकरण महा अभियान भी चला रही है। यह महा अभियान वैक्सीन लगवाने की रफ्तार में पावर बूस्टर का काम कर रहा है। रुड़की शहर की बात छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में 94 से 98 प्रतिशत तक टीकाकरण हो चुका है, लेकिन अब शेष बचे दो से छह प्रतिशत टीकाकरण को पूरा करने में स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं। इसका कारण यह है कि इस बचे हुए टीकाकरण में अधिकतर गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं वैक्सीन लगवाने से झिझक रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस समय करीब 12 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें से डॉक्टरों और अधिकारियों के लाख प्रयास के बाद केवल दो हजार महिलाओं ने ही टीका लगवाया है, जबकि अन्य महिलाएं टीका लगवाने को लेकर मन में भ्रम बनाए हुए हैं।
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अब केवल गर्भवती महिलाएं ही शेष
नारसन सीएचसी के प्रभारी डॉ. डीएस तिवारी के अनुसार उनके यहां करीब 98 प्रतिशत तक टीकाकरण हो चुका है, जबकि केवल दो प्रतिशत यानी करीब पांच हजार लोग ही शेष बचे हैं। इनमें करीब 4500 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। इन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने को लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ये वैक्सीन नहीं लगवा रही हैं।
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टीका लगवाने को तैयार नहीं महिलाएं
इमलीखेड़ा पीएचसी प्रभारी डॉ. दिलीरमन ने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 84 गांव शामिल हैं। इनमें 94 प्रतिशत तक टीकाकरण हो चुका है। शेष करीब चार हजार लोग बचे हुए हैं। इनमें करीब 2800 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। इन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए आंगनबाड़ी, आशा और शिक्षकों के माध्यम से समझाया जा रहा है। 300 महिलाओं को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
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अंत तक करेंगे टीका लगवाने का प्रयास
भगवानपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. विक्रांत सिरोही का कहना है कि उनके क्षेत्र में 106 गांव शामिल हैं। यहां करीब 96 प्रतिशत तक वैक्सीनेशन हो चुका है। अब करीब 2300 लोग ही बिना टीके के रह गए हैं, जबकि बार-बार समझाने के बाद उनकी टीम अभी तक 1019 गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन लगा भी चुकी है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द से जल्द सौ फीसदी टीकाकरण हो जाए।
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महिलाओं में जागरूकता की कमी
शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की परियोजना प्रबंधक रंजना भटनागर ने बताया कि उनके सेंटरों पर इस समय 1487 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। हालांकि इसमें सिविल अस्पताल और सलेमपुर जाने वाली महिलाओं की संख्या नहीं है। शुरू में गर्भवती महिलाएं टीका नहीं लगवा रही थीं। अब धीरे-धीरे कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुए और उनके समझाने पर ये महिलाएं भी टीका लगवाने लगी हैं।
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कोरोना की नई गाइडलाइन के तहत गर्भवती महिलाओं को भी कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही है। इससे गर्भवती महिला या उसके शिशु को कोई नुकसान नहीं है, बल्कि वैक्सीन लगने से गर्भवती महिलाएं और उनका बच्चा कोरोना महामारी से छुटकारा पा सकते हैं। महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाएं सरकार और स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करके सौ फीसदी टीकाकरण करवाएं।
-डॉ. एसके झा, सीएमओ, हरिद्वार