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बिना गुरुजी के कैसे होगी स्कूलों में पढ़ाई

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प्रदेश सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों को खोलने के आदेश तो जारी कर दिए हैं लेकिन पढ़ाई कैसे होगी। क्षेत्र में अधिकतर शिक्षकों की ड्यूटी विधानसभा चुनाव में लगा दी गई है। इसके अलावा कुछ शिक्षक लंबे समय से कोरोना हेल्प डेस्क पर ड्यूटी देते आ रहे हैं। पहले दिन खुले कई स्कूलों में ऐसी स्थिति थी कि एक भी टीचर मौजूद नहीं था। अन्य स्कूल से टीचरों को बुलाकर छात्रों को पढ़ाना पड़ा।
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इस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा कुछ टीचर शुुरू से ही कोरोना हेल्प डेस्क पर ड्यूटी दे रहे हैं। इसी बीच सोमवार को शहर में कक्षा एक से नौ तक के सरकारी और अर्द्धसरकारी स्कूलों को भी खोल दिया गया। इस समय रुड़की में कक्षा एक से आठ तक के करीब 133 स्कूल हैं। इन स्कूलों में 512 शिक्षक तैनात हैं। खास बात ये है कि इन शिक्षकों में से करीब 410 की ड्यूटी चुनाव में लगाई गई है। इस कारण हर दिन इनकी ट्रेनिंग चल रही है। ऐसे में सोमवार को छात्रों को पढ़ाने के लिए अधिकतर स्कूलों में नाममात्र शिक्षक थे। शिक्षकों के अभाव के चलते कहीं बच्चों को जल्दी छुट्टी देनी पड़ी तो कहीं एक ही टीचर को हर कक्षा में जाकर पढ़ाना पड़ा। वहीं सोमवार को सभी महिला शिक्षकों की ट्रेनिंग भी निर्धारित थी। ऐसे में उन स्कूलों में एक भी टीचर नहीं थी जहां केवल महिला शिक्षकों का ही स्टाफ है। ऐसे में इन स्कूलों में अन्य स्कूलों से स्टाफ बुलाकर शिक्षण कार्य सुचारु करवाया गया।
कुछ स्कूल हो चुके मतदान केंद्र घोषित
क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्राथमिक स्कूलों को मतदान केंद्र खोलने के लिए चयनित कर लिया गया है। ऐसे में यहां मतदान केंद्र खोलने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। कक्षाओं की बेंच एक जगह एकत्र कर दी गई है। सोमवार को स्कूल पहुंचे छात्रों को बैठने के लिए बेंच नहीं मिली। बाद में शिक्षकों ने छात्रों के साथ मिलकर बेंच लगाई, तब जाकर छात्रों की पढ़ाई शुरू हो सकी।
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निर्वाचन आयोग ने दिए थे व्यवस्था के निर्देश
विधानसभा चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर देहरादून निवासी एक एडवोकेट ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर कहा कि शिक्षकों की ड्यूटी छात्रों की पढ़ाई को देखकर लगाई जाए। पत्र में स्पष्ट किया था कि वैसे ही पहले से स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में हर स्कूल से 50 फीसदी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसपर सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर मामले का संज्ञान लेने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बिना कार्ययोजना बनाए शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई। इसका खामियाजा अब स्कूल खुलने पर बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
स्कूल खुलने के पहले दिन कुछ जगह शिक्षकों के अभाव की समस्या देखने को मिली। व्यवस्थाएं सुधारने के लिए अब बीएड प्रशिक्षुओं को चुनाव होने तक पढ़ाई करवाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
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- सुबोध मलिक, प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी
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