कृषि कानून वापस लेने, गन्ना मूल्य 400 रुपये क्विंटल करने और भुगतान में विलंब होने पर ब्याज देने सहित सात सूत्री मांगों को लेकर किसानों ने भारतीय किसान यूनियन रोड़ गुट के नेतृत्व में प्रशासनिक भवन में प्रदर्शन किया। बेलड़ा से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान सिविल लाइंस होते हुए तहसील पहुंचे। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह जाम लग गया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किसान प्रतिनिधिमंडल के बीच पहुंचकर सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों का काफिला लौटा।
सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, भाकियू रोड़ गुट के प्रदेश अध्यक्ष पद्म सिंह रोड़ के नेतृत्व में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर बेलड़ा में हाईवे पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में रुड़की की ओर बढ़े। बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आ रहे किसानों को देखकर पुलिस-प्रशासन के पसीने छूट गए। अधिकारियों ने जगह-जगह पुलिस का पहरा बैठा दिया। मलकपुर चुंगी पर कुछ देर रुककर किसानों की रैली नगर निगम पुल और सिविल लाइंस होते हुए तहसील के बाहर पहुंची। यहां हाईवे जाम होने और तहसील में पर्याप्त जगह नहीं होने पर अधिकारियों ने किसानों को प्रशासनिक भवन में वार्ता के लिए बुलाया। इसके बाद किसानों की रैली जादूगर रोड और वोट क्लब होते हुए प्रशासनिक भवन पहुंची। यहां किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ ही देर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह अधिकारियों के साथ पहुंचे। उन्होंने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। इस दौरान पद्म सिंह रोड़ ने किसानों की सात सूत्री मांगों से अवगत कराया।
इसमें तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, गन्ना भुगतान 14 दिन के अंदर करने, विलंब होने पर ब्याज देने गन्ना मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल करने, ऊर्जा निगम की ओर से किसानों के बिजली संबंधित भ्रष्टाचारों की जांच कराने और किसानों को बिजली-पानी की सुविधा निशुल्क देना शामिल हैं। इसके अलावा चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार की जांच कराने, फसलों के दाम उगने से पहले तय करने, एचआरडीए का ग्रामीण क्षेत्रों से अधिकार खत्म करने, किसानों और ग्रामीणों पर पुलिस के अत्याचार को बंद करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि उक्त मांगों को लेकर वे लंबे समय से आंदोलनरत हैं, लेकिन प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहा है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने आश्वासन दिया कि 12 नवंबर को वे प्रशासन, चकबंदी, ऊर्जा निगम, गन्ना विभाग आदि के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करेंगे। इसमें किसानों की मांगों का समाधान निकाला जाएगा। इसके बाद किसान वापस लौटे। मौके पर इंदर सिंह रोड़, जिलाध्यक्ष नाजिम अली, जिला उपाध्यक्ष मुबारिक अली, युवा जिलाध्यक्ष संजीव कुशवाहा, तहसील अध्यक्ष सलमान, अनीस, कारी शहजाद, प्रवेश, प्रदीप त्यागी, राजेश सैनी मौजूद थे।
पुलिस के खिलाफ की नारेबाजी
किसानों की रैली नगर निगम पुल से होते हुए सिविल लाइंस से निकल रही थी। इस दौरान सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने ट्रैक्टरों को रोकना चाहा तो किसान भड़क उठे। उनका कहना था कि ये रैली पूर्व निर्धारित थी। इसलिए पुलिस को पहले से ही व्यवस्था करनी चाहिए थी। गुस्साए किसानों ने वहीं पर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप से रैली रवाना हुई।
करना पड़ा रूट डायवर्ट
जैसे ही किसानों की रैली सिविल लाइंस से रुड़की टॉकीज के पास पहुंची तो हाईवे पर जाम लगना शुरू हो गया। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा। बस अड्डे की तरफ जा रहे वाहनों को पुलिस ने बोट क्लब की ओर से नहर किनारे से दूसरी ओर निकाला। मिलिट्री चौक से बस अड्डे की ओर आ रहे वाहनों को भी नहर किनारे से बाजार में निकाला। इससे हाईवे पर ज्यादा देर के लिए जाम की स्थिति नहीं बनी।
एक लाइन में चले किसान
भाकियू रोड़ गुट की रैली में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर शामिल थे। पुलिस को अंदेशा था कि ट्रैक्टर यदि हाईवे पर एक लाइन में नहीं चले तो जाम विकराल रूप ले सकता है ऐसे में पुलिस बल किसानों के ट्रैक्टरों के साथ ही आगे बढ़ता गया। हालांकि, किसानों ने भी समझदारी का परिचय दिया और हाईवे से लेकर बाजार तक केवल एक लाइन बनाकर चलते रहे। इससे जाम ज्यादा देर तक नहीं टिका।
यात्रियों को झेलनी पड़ी मुसीबत
भाकियू के जुलूस के कारण दिल्ली की ओर से आने वाली बसें एसडीएम कोठी के पीछे से होकर गुजरीं। इस बीच अंदरूनी मार्गों पर भी लोगों को जाम से जूझना पड़ा। एसडीएम चौक के पास से जब बस मोड़ने की कोशिश की गई तो कई लोगों ने परिचालक से बस वहीं रोकने के लिए कहा। इसके बाद कई लोग बस स्टैंड के लिए पैदल ही रवाना हुए। इसके अलावा कई लोग जामुन रोड पर उतरकर सिविल लाइंस चौक पहुंचे।