रुड़की। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में क्षेत्र के किसानों ने प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण अधिशासी अभियंता और जेई को बंधक बना लिया। उन्होंने क्षेत्र के जेई पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उसे हटवाने और क्षेत्र में छापा मारकर किसानों पर दर्ज किए जा रहे मुकदमे वापस लेने की मांग की। बाद में अधिकारियों ने तीन दिन में जेई पर कार्रवाई सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। ऐसे में करीब चार घंटे बाद किसानों ने ईई और जेई को बंधकमुक्त किया।
मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह रोड़ के नेतृत्व में बेहड़की, सैदाबाद, देवपुरा, खाताखेड़ी, माजरा, मूलेवाला, सोहलपुर और सिकरोड़ा आदि गांवों के किसान रैली के रूप में सिंचाई विभाग के प्रशासनिक भवन में एकत्र हुए। यहां से ऊर्जा निगम के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए किसान मलकपुर चुंगी स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। किसानों ने अधिशासी अभियंता और एक जेई को बंधक बनाकर अपने बीच में बैठा लिया। किसानों ने उनके सामने ही ऊर्जा निगम पर उनका उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। किसान नेता पदम सिंह रोड़ ने क्षेत्र के जेई पर मनमानी करने और किसानों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। कहा कि जेई की कार्यशैली से क्षेत्र का हर किसान और ग्रामीण परेशान है। कई बार शिकायत के बाद भी जेई पर कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोपी जेई पर कार्रवाई करते हुए उसका ट्रांसफर करवाने की मांग की। साथ ही किसानों पर दर्ज केस भी वापस किए जाने की मांग की। करीब चार घंटे बंधक बने रहने के बाद अधिकारियों ने मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन दिन का समय मांगा। अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने धरना समाप्त किया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष नाजिम अली, युवा जिला अध्यक्ष संजीव कुशवाह, जिला उपाध्यक्ष मुबारक अली, प्रदेश महासचिव हाजी मो. इरशाद, प्रदेश सचिव अनीस अहमद, कारी शहजाद, रियासत, महेंद्र सैनी, सतीश कुमार सैनी, मोहम्मद आलम, राजवीर सैनी, शोभाराम प्रजापति, मंगत राम सैनी, अमित पाल आदि किसान मौजूद थे।
पांच मिनट में बाहर आने का दिया अल्टीमेटम
मंगलवार को जब काफी देर तक अधिकारी किसानों के बीच उनकी समस्याएं सुनने नहीं पहुंचे तो उन्होंने माइक पर अधिकारियों को पांच मिनट में बाहर आने का अल्टीमेटम दिया। किसानों ने माइक पर कहा कि किसान बाहर धूप में बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं और अधिकारी अंदर अपने कार्यालय में एसी में बैठे हैं। ऐसे में ठीक तीन मिनट शेष बचने पर जेई बाहर आ गए। इसके बाद जैैसे ही अंतिम मिनट में किसानों ने खड़े होने की बात कही तो ईई भी बाहर आ गए। इसके बाद किसानों की अधिकारियों से वार्ता शुरू हुई।
सिलिंडर और चूल्हा लेकर पहुंचे थे किसान
भाकियू टिकैत गुट के किसान ऊर्जा निगम से आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बनाकर धरना-प्रदर्शन में पहुंचे थे। किसान अपने साथ खाना बनाने के लिए सिलिंडर, चूल्हा, बर्तन और अनाज लेकर आए थे। किसानों ने धरना शुरू होने के एक घंटे बाद ही खाना बनाना भी शुरू कर दिया था। करीब एक घंटे बाद खाना तैयार हुआ तो पंगत में बैठकर किसान खाना खाते रहे और धरने में बैठते रहे। किसानों ने स्पष्ट कर दिया था कि मांग पूरी नहीं होने तक धरना जारी रहेगा।
जेई को नहीं बुलाने पर भड़के किसान
धरने के दौरान किसान आरोपी जेई को मौके पर ही बुलाने की जिद करते रहे। इस दौरान अधिकारी बार-बार कार्रवाई किए जाने की बात कह रहे थे। इस पर किसान भड़क उठे। उन्होंने अधिकारियों पर ही जेई से मिलीभगत के आरोप लगाने शुरू कर दिए। बढ़ते हंगामे पर ईई ने जेई को फोन किया तो फोन बंद मिला। इस पर ईई ने अधीक्षण अभियंता को फोन किया और जेई के बारे में उन्हें जानकारी दी।
किसानों की शिकायतों की जानकारी मिली है। आरोपी जेई के खिलाफ जांच करवाई जा रही है। यदि जांच में किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं तो जेई पर कार्रवाई की जाएगी।
-राहुल जैन, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम