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मौसम परामर्श सेवाएं किसानों के लिए लाभदायक

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ग्रामीण कृषि-मौसम सेवा परियोजना के नोडल अधिकारी प्रोफेसर आशीष पांडेय ने कहा कि कृषि-मौसम परामर्श सेवाएं किसानों को उनके दिन-प्रतिदिन के कृषि कार्य के बारे में निर्णय लेने में सहायक होती हैं। उन्होंने किसानों को जलवायु की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खेती-किसानी के कार्यों में मौसम सेवाओं की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत बृहस्पतिवार को आईआईटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग में संचालित ग्रामीण कृषि-मौसम सेवा परियोजना एवं भू-अमृत किसान उत्पादक संघ की ओर से भगवानपुर ब्लॉक के सिकंदरपुर गांव में किसान गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में वक्ताओं ने किसानों को कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं के प्रति जागरूक किया। आईआईटी के प्राध्यापक प्रो. एमएल कंसल ने किसानों को स्वयं व पशुओं के उपयोग में लाए जाने वाले पानी को कीटाणु मुक्त किए जाने के तरीकों से अवगत कराया। बताया कि कीटाणु मुक्त पानी पीने से किसान के साथ ही पशु भी दूषित पानी से फैलने वाले कई रोगों से बच सकते हैं। भू-अमृत किसान उत्पादक संघ के चेयरमैन एवं प्रगतिशील कृषक रवि किरन सैनी ने किसानों को मौसम सेवाओं से होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी दी।
बताया कि यदि किसानों को बारिश का पूर्वानुमान हो जाए तो वे एक सिंचाई की बचत करके कम से कम पांच सौ रुपये प्रति एकड़ बचा सकते हैं। कृषि मौसम परामर्श सेवाओं को सही समय पर अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से भू-अमृत किसान उत्पादक संघ के सीईओ नवीन कुमार और डायरेक्टर गुरविंदर सिंह स्वयं मौसम मित्र की भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम में जीकेएमएस परियोजना के तकनीकी अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार, अंबुजा सीमेंट के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तेजेंद्र सिंह, कृषि विभाग भगवानपुर के प्रभारी दिनेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के वैज्ञानिक डॉ. वाईपी सैनी, माधव, प्रदीप कुमार तिवारी, आईआईटी रुड़की के समन्वयक प्रो भानु प्रकाश, डायरेक्ट रनरेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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