रुड़की। वैसे तो दो घरों को रोशन करने वाली बेटियों के लिए हर दिन खास होता है, लेकिन कुछ वर्षों से हर साल मनाया जा रहा डॉटर्स डे पूरी तरह से बेटियों को समर्पित होता है। डॉटर्स डे पर माता-पिता ने व्हाट्सअप और फेसबुक पर स्टेटस लगाकर बेटियों को दुलार दिया।
बेटियां माता-पिता को कुदरत का दिया हुआ एक अनमोल और खूबसूरत तोहफा है। बेटियों के आने से घर-आंगन खुशियों से भर जाते हैं। पैदा होने पर मां-बाप का घर रोशन कर देती हैं और शादी के बाद ससुराल में खुशियों के फूल बिखेर देती हैं। सही मायने में बेटी की अहमियत उसके मां-बाप से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता, इसलिए बेटियों को सम्मान और दुलार देने के लिए हर साल सितंबर के चौथे रविवार को अंतरराष्ट्रीय डॉटर्स डे मनाया जाता है। चौथे रविवार को शहर में बेटी दिवस धूमधाम से मनाया गया। रविवार को बेटी के माता-पिता ने अपने अपने अंदाज में डॉटर्स डे मनाया। बेटियों को शुभकामनाएं देने के लिए अभिभावकों ने सुबह ही स्टेटस पर बेटियों को खूबसूरत फोटो लगा ली थी। कुछ अभिभावकों ने दिनभर बेटियों की ख्वाइश पूरी की। सोलानीपुरम निवासी रामकुमार ने बताया कि उनकी दो बेटियां दिव्यांशी ओर प्रियांशी हैं। दोनों उन्हें जान से ज्यादा प्यार करती हैं। डॉटर्स डे पर उन्होंने बेटियों को गिफ्ट देकर खुश किया। आवास विकास निवासी प्रिया ने डॉटर्स डे पर केक काटा। उन्होंने कहा कि बेटे भाग्य से मिलते हैं तो बेटियां सौभाग्य से मिलती हैं। जब से उनके घर में बेटियां पैदा हुई हैं, उनका व्यापार लगातार बढ़ता जा रहा है। वह मानते हैं कि सब कुछ बेटियों की वजह से हो रहा है। बुजुर्ग विश्वास श्रीवास्तव का कहना है कि उनके तीन बेटे और एक बेटी है। तीनों बेटे मिलकर उन्हें जो खुशी नहीं दे पाए, अकेले उनकी बेटी ने दे दी है। आज का दिन वह अपनी बेटी को समर्पित करते हैं।
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अब देश में मनाया जा रहा बेटी दिवस
11 अक्तूबर 2012 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र ने बेटियों को सम्मान देने के लिए और बेटों और बेटियों के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए बेटी दिवस मनाने का निर्णय लिया था। शुरू में यह दिवस केवल कुछ देशों में मनाया गया। इसके बाद अब धीरे-धीरे भारत में इस दिवस को धूमधाम से मनाया जाने लगा।