गांव में भले ही कुछ लोगों ने नफरत के पत्थर फेंककर आपसी सौहार्द को खत्म करने की कोशिश की हो लेकिन इसी गांव के स्कूल में हरदम साथ-साथ दिखाई देने वाली कक्षा दस की छात्राएं अंशुका और लूबना सौहार्द की मिसाल पेश कर रही हैं। दोनों छात्राएं हर हाल में अपनी दोस्ती कायम रखना चाहती हैं। दोनों का कहना है कि गांव में स्थिति कुछ भी हो वह दोस्ती नहीं छोड़ेंगी।
बाबू आशाराम राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डाडा जलालपुर की अलग-अलग समुदायों की छात्राएं नफरत के बीच बड़ों को भी दोस्ती और भाईचारे की सीख दे रही हैं। डाडा जलालपुर निवासी कक्षा 10 की छात्रा अंशुका और लूबना की दोस्ती की क्षेत्र के लोगों में खूब चर्चा हो रही है। बुधवार को स्कूल पहुंची दोनों छात्राओं से जब पत्रकारों ने सवाल पूछे कि आपको ऐसी स्थिति में स्कूल आने से डर नहीं लग रहा तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वो दोनों दोस्त अलग-अलग धर्मों से हैं लेकिन उन्हें आपस में मिल-जुलकर रहना अच्छा लगता है। गांव में तैनात पुलिसकर्मी भी उनसे बेहतर व्यवहार कर रहे हैं। इस कारण उन्हें स्कूल तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है।