कुछ साल पहले हुए करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में एक और छात्रवृत्ति घोटाले ने दस्तक दे दी है। मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र लगाने के मामले सामने आए हैं। हरिद्वार जिले में खानपुर ब्लॉक को छोड़कर अन्य पांच ब्लॉकों में आवेदन के साथ लगे 100 से अधिक आय प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। विभाग ने प्रशासन को सूचना देकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह गड़बड़ी विभागीय स्तर पर नहीं बल्कि आवेदनकर्ताओं की ओर से किए जाने की आशंका है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना शुुरू की है। इसके तहत छात्राओं को 10 से 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। योजना के तहत वे छात्राएं आवेदन कर सकतीं हैं जिनका या तो बीपीएल कार्ड हो या अभिभावकों की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 81 हजार और शहरी क्षेत्र में एक लाख रुपये हो। इस साल योजना के तहत जिले में बड़ी संख्या में छात्राओं ने आवेदन किया है। भगवानपुर ब्लॉक के अधिकारियों ने सिकरोढ़ा गांव से आए आवेदनों के साथ लगे आय प्रमाणपत्रों की जांच की तो वे फर्जी मिलने शुरू हुुए। अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन से जो आय प्रमाणपत्र आठ हजार रुपये का बनाया गया था, वही प्रमाणपत्र विभाग के पोर्टल पर छह हजार रुपये का पाया गया। मामला जिले तक पहुंचने पर अधिकारियों ने हर ब्लॉक से आए प्रमाणपत्रों की जांच करवाई तो परिणाम चौंकाने वाला था। हर ब्लॉक से आए आवेदनों में बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।
हैरानी की बात ये है कि जहां से जांच शुरू हुई वहां सबसे कम 14 प्रमाणपपत्र फर्जी मिले जबकि लक्सर ब्लॉक फर्जीवाड़े में सबसे आगे निकला। यहां अभी तक हुई जांच में 50 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। इसी तरह रुड़की और नारसन ब्लॉक में 49 और बहादराबाद में 37 प्रमाणपत्र फर्जी मिले। खानपुर ब्लॉक से एक भी छात्र ने योजना के तहत आवेदन नहीं किया था। मामला सामने आने पर अधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया। पता चला कि उनके स्तर पर बनाया गया आय प्रमाणपत्र सही था। जो प्रमाणपत्र पोर्टल पर अपलोड किया गया वह फर्जी था। अधिकारियों का दावा है कि आवेदकों की ओर से ही गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
पिछले साल मिली थी फर्जी मार्कशीट
अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत पिछले साल भी बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। उस दौरान आवेदन के साथ लगाई गई मार्कशीट की जांच की गई। इसमें लक्सर ब्लॉक के एक स्कूल की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। दरअसल, योजना के तहत 60 फीसदी से ज्यादा अंक लाने वाली छात्रा को ही प्रोत्साहन राशि मिलती है। बहुत से आवेदन ऐसे थे जिनके साथ जमा की गई मार्कशीट में अंक 60 से 80 फीसदी तक दिखाए गए थे जबकि असल में उनके अंक 40 से 50 फीसदी ही थे। जब छात्रों से संपर्क किया गया तो पता चला कि उन्होंने तो आवेदन ही नहीं किया था। संबंधित स्कूल प्रबंधक का कहना था कि उनकी ओर से आवेदन किया ही नहीं जाता।
...तो सीएससी से हुआ फर्जीवाड़ा
भगवानपुर तहसीलदार रेखा आर्य ने बताया कि विभाग ने सिकरोढ़ा और आसपास के गांवों में आय प्रमाणपत्रों की जांच करवाई है। अभी तक हुई जांच में ये सामने आया है कि लेखपाल ने संबंधित व्यक्ति का आय प्रमाणपत्र सही बनाया था जबकि उसी आवेदन संख्या का जो आय प्रमाणपत्र पोर्टल पर अपलोड किया गया है वह कम आय का है। उन्होंने बताया कि लेखपाल की ओर से जारी किए जाने वाला प्रमाणपत्र का प्रिंट सीएससी से निकाला जाता है। ऐसे में अंदेशा है कि प्रिंट निकालते हुए या पोर्टल पर प्रमाणपत्र अपलोड करते हुए गड़बड़ी की गई होगी।
फर्जी आय प्रमाणपत्र का मामला संज्ञान में आने पर निदेशालय को पत्र भेजकर आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। प्रथमदृष्ट्या सामने आया है कि जो आय प्रमाणपत्र प्रशासन से जारी किया गया था, उसमें छेड़छाड़ कर आय कम दिखाया गया है। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
-योगेश भारद्वाज, जिला प्रभारी, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग