स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना संक्रमण की चौथी लहर की आशंका जताई जा रही है। इसके बावजूद प्रदेश की सीमाओं पर कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है। जबकि हर रोज बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों के लोग उत्तराखंड का रहे हैं। अब चारधाम यात्रा के दौरान इनकी संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। नारसन बॉर्डर पर बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों की जांच नहीं की जा रही है। सीमा पर पहले से बनाई गई चौकी और कोरोना जांच के बूथ खाली पड़े हैं।
देश के साथ प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण के केस बढ़ने लगे हैं। कई नेता, अधिकारी और स्कूली बच्चे संक्रमित पाए गए हैं। एक तरफ प्रदेश सरकार ने मास्क नहीं पहनने वालों पर जुर्माना लगाने की बात कही, वहीं बॉर्डर पर लापरवाही बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लेकिन बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। ऐसे में प्रदेश में दोबारा से कोरोना का कहर बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। क्योंकि समय दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, नोएडा आदि से प्रदेश में हर दिन बड़ी संख्या में यात्री आ रहे हैं।
मालूम हो कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने आउटसोर्स से कर्मचारियों की तैनाती की थी। यही कर्मचारी कोविड, सैंपिलंग, जांच और ट्रेसिंग का काम कर रहे थे। बॉर्डर पर भी इनको तैनात किया गया था। इस मार्च में इनकी सेवाएं समाप्त कर दी। इसके अलावा बॉर्डर पर अधिकारियों के साथ पुलिस की तैनाती की गई थी। अब बॉर्डर पर कोई नहीं है। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि अभी विभाग को लोगों के सैंपल लेने के निर्देश नहीं हुए हैं। निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।