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पुलिस के हत्थे चढ़े अंतरराज्यीय टप्पेबाज गिरोह के सदस्य

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ऋषिकेश। कोतवाली पुलिस ने बच्चों से टप्पेबाजी कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। दोनों सगे भाई हैं। वहीं चोरी की वारदात में शामिल एक 12 वर्षीय नाबालिग को पुलिस ने अपने संरक्षण में ले लिया है। आरोपियों के पास से पुलिस को विभन्न स्थानों से चुराए गए 13 मोबाइल बरामद हुए हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया है।
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शुक्रवार को पुलिस ने अंतरराज्यीय टप्पेबाज गिरोह का भंडाफोड़ किया। सीओ ऋषिकेश डीसी ढौंडियाल ने बताया कि पुलिस को दी तहरीर में यशपाल अरोड़ा पुत्र स्व. ईश्वर दास अरोड़ा निवासी मन्नत रेजीडेंसी, विस्थापित कॉलोनी, ऋषिकेश, देहरादून ने बताया था कि 30 दिसंबर को झंडा चौक से घर वापस लौटने के दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उनका मोबाइल चोरी कर लिया था। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज मामले की जांच शुरू की। आसपास के करीब 35 सीसीटीवी की फुटेज को खंगाला गया। पुलिस को सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में आरोपी फोन उठाते हुए नजर आए थे। पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया। वहीं 12 संदिग्धों से पूछताछ भी की। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों को बस अड्डे के पीछे से 13 मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया। बरामद मोबाइलों में यशपाल अरोड़ा का मोबाइल भी शामिल था। सीओ ऋषिकेश ने बताया कि आरोपियों ने मोबाइल विभिन्न स्थानों से चोरी किए थे। उन्होंने बताया कि आरोपियों की पहचान पप्पू महतो निवासी ग्राम नया टोला, कल्याणी महाराजपुर बाजार, साहिबगंज झारखंड और संजय कुमार महतो निवासी ग्राम नया टोला कल्याणी महाराजपुर बाजार साहिबगंज झारखंड के रूप में हुई है। आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है। आरोपी चोरी का काम एक 12 वर्षीय बच्चे से कराते हैं। पुलिस ने बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया है। इस मौके पर कोतवाली निरीक्षक रवि सैनी मौजूद थे।
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पड़ोसी के बेटे कराते थे चोरी
ऋषिकेश। पुलिस से पूछताछ में आरोपी पप्पू महतो और संजय महतो ने बताया कि वे झारखंड के रहने वाले हैं। दो दिन पहले उन्होंने झारखंड से हरिद्वार आकर एक धर्मशाला में कमरा लिया था। इसके बाद हरिद्वार ऋषिकेश समेत विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए 13 मोबाइल चुराए थे। आरोपियों ने बताया कि वे अपने पड़ोसी के एक बच्चे को साथ रखते थे। इससे लोगों को उन पर शक नहीं होता था। आरोपियों ने बताया कि वे चोरी का काम भी बच्चे से ही कराते थे। बताया कि वे मोबाइल को खोलकर उसके पार्ट्स को बेचा करते थे। इससे उनके पकड़ने की संभावना समाप्त हो जाती थी।
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