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सभी भाषाओं की जननी है संस्कृत: एसपी खाली

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उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा निदेशालय की ओर से श्री जयराम संस्कृत महाविद्यालय में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने प्रतिभाग किया।
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शनिवार को संस्कृत शिक्षा निदेशक शिवप्रसाद खाली ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत देववाणी को बचाया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। संस्कृत का उद्धार तभी होगा, जब वे कड़ी मेहनत और निष्ठा के साथ कार्य करेंगे। वर्तमान समय में नया पाठ्यक्रम भी बहुत अच्छा बना है। संस्कृत विद्यालय में कार्यरत प्रधानाचार्यों को अच्छा वेतन दिये जाने के साथ उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमें संस्कृत भाषा को लेकर लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है। कार्यशाला के दौरान वर्तमान समय में विद्यालयों की स्थिति और भूमिका, आदर्श विद्यालयों की संरचना और उनमें संसाधनों की अभिवृद्धि किए जाने के साथ सामुदायिक सहभागिता निभाने पर भी विचार किया गया। कार्यशाला में उपनिदेशक पद्माकर मिश्र, डॉ. वाजश्रवा आर्य, संजू प्रसाद ध्यानी, मायाराम रतूड़ी, डॉ. जनार्दन कैरवान, डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल, विनायक भट्ट, विजय जुगलान, कृष्णप्रसाद उनियाल, डॉ. नवीन चंद्र जोशी आदि शामिल थे।
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