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कांवड़ियों ने भेष बदला तो कैसे रोकेगी पुलिस

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ऋषिकेश। श्रावण मास शुरू होने के साथ ही उत्तराखंड की सीमाओं को कांवड़ियों के लिए सील कर दिया जाएगा। हालांकि सीमाओं पर सभी लोगों की कोविड जांच रिपोर्ट चेक करना संभव नहीं है। खासकर जब कांवड़िए सामान्य भेष में आएंगे तो उनको पहचानना बड़ा मुश्किल होगा। लेकिन जब ये कांवड़िए त्रिवेणी घाट, पूर्णानदंघाट, लक्ष्मणझूूला और स्वर्गाश्रम में जल भरकर और नीलकंठ धाम में दर्शन के लिए योगनगरी पहुंचेंगे तो पुलिस प्रशासन के लिए उनको रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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कोरोनाकाल के चलते प्रदेश सरकार ने इस बार भी कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया है। विभिन्न प्रांतों के कांवड़िए गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार और तीर्थनगरी में न पहुंचे इसके लिए 22 जुलाई को प्रदेश की सीमाओं को बंद करने के भी आदेश जारी हो गए हैं। ऐसे में कई कांवड़िए भेष बदलकर तीर्थनगरी पहुंचेंगे। पुुलिस प्रशासन ऐसे कांवड़ियों को कैसे रोकेगी, यह पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनेगा।
वर्तमान परिस्थितियों की बात करें तो इस समय भी कई प्रांतों के कांवड़िए भेष बदलकर स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती, त्रिवेणीघाट से जल भरकर अपने चौपहिया और दोपहिया वाहनों से नीलकंठ धाम पहुंच रहे हैं। नीलकंठ में जलाभिषेक करने के बाद वे अपने गंतव्यों की ओर रवाना हो रहे हैं। कुछ शिवभक्त टूरिस्ट टैक्सी ऑनर्स एसोसिएशन लक्ष्मणझूला के वाहनों में सवार होकर नीलकंठ धाम पहुंच रहे हैं। आलम यह है कि प्रतिबंध होने के बावजूद भी इन दिनों नीलकंठ धाम में प्रतिदिन हजारों लोग जलाभिषेक कर रहे हैं। कैलासगेट, तपोवन और गरुड़चट्टी चैकपोस्ट औपचारिकता के लिए कोविड-19 जांच केंद्र बनकर रह गया है।
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स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि जो भी कावंड़िया भेष बदलकर तीर्थनगरी में पहुंचेगा यहां आने से पहले उसे मंगलौर, रुड़की, बहादराबाद, हरिद्वार और रायवाला के चेकपोस्टों से होकर गुजरना पड़ेगा। अगर कोई भी कांवड़िया इन चेकपोस्टों से होकर गुजर भी जाएगा तो इसके बाद उसे कैलासगेट, तपोवन और गरुड़चट्टी के चैकपोस्टों से होकर भी गुजरना पड़ेगा। जहां पुलिस प्रशासन सख्त चौकसी बढ़ाएगी।

त्रिवेणीघाट की ओर कांवड़ लेकर जाता शिवभक्त।- फोटो : RISHIKESH

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