ऋषिकेश। वैकल्पिक मार्ग (कॉजवे) के बचाव और भू-कटाव को रोकने के लिए जाखन नदी में चैनेलाइजेशन किया गया था। लेकिन अनियोजित ढंग से हुए चैनेलाइजेशन के चलते नदी का रुख काजवे के जौलीग्रांट छोर की तरफ हो गया। जिससे काजवे का 300 मीटर हिस्सा नदी में समा गया।
जिलाधिकारी को सौंपी रिपोर्ट में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बाढ़ से सुरक्षा के लिए जाखन नदी के बीचों बीच 580 मीटर लंबे क्षेत्र में एक मीटर गहराई तक चैनेलाजेशन की जरूरत बताई थी। प्रशासन से विशेष अनुमति मिलने के बाद विभाग ने चैनेलाइजेशन का काम शुरू कर दिया था। बाढ़ की स्थिति में नदी के दोनों छोरों पर भू कटाव को रोकने और काजवे की सुरक्षा के लिए पानी को विभिन्न धाराओं में बांटने की जरूरत थी। लेकिन मंगलवार को उफान पर आने के बाद जाखन नदी का रुख जौलीग्रांट छोर की ओर हो गया। एक ही स्थान पर नदी का प्रचंड वेग काजवे सहन नहीं कर पाया, जिससे काजवे का 300 मीटर हिस्सा नदी में बह गया। वहीं लोक निर्माण विभाग ने भी काजवे में पानी की निकासी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए थे।
सिंचाई विभाग नेे चैनेलाइजेशन का कार्य किया था। विभाग अब भू-कटाव को रोकने के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्य कर रहा है। काजवे पर पानी निकासी की व्यवस्था लोनिवि की ओर से की जानी थी।
- अनुभव नौटियाल, उपखंड अधिकारी, सिंचाई विभाग, ऋषिकेश