एम्स में तीन दिवसीय एटीएलएस व एटीसीएन कार्यशाला में प्रतिभागी विशेषज्ञ।
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ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (एटीएलएस) एवं एडवांस ट्रॉमा केयर फॉर नर्सेस (एटीसीएन) ट्रेनिग वर्कशॉप के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आपात स्थिति में जरूरी उपचार व सावधानियों के बारे में जानकारी दी।
शनिवार को आयोजित कार्यशाला में एम्स निदेशक प्रो.रविकांत ने कहा कि एटीएलएस व एटीसीएन विषयों में हर चिकित्सक व नर्सिंग ऑफिसर्स की दक्षता जरुरी है। जिससे आपात स्थिति में मरीज की जीवन रक्षा की जा सके। उन्होंने सभी चिकित्सकों से ध्यानपूर्वक प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने और इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं में शिरकत कर दक्षता हासिल करने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का की अपील की। कहा इससे हम दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम कर सकते हैं। कार्यशाला में एम्स रायबरेली के डॉ. हर्षित अग्रवाल ने जले हुए मरीजों के उपचार और मरीज को घटनास्थल से अस्पताल के लिए सुरक्षित रेफरल प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। एम्स ऋषिकेश के न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सक डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने दुर्घटना में सिर पर लगने वाली चोटों में प्राथमिक उपचार के तरीके बताए, साथ ही रीढ़ की हड्डी से संबंधित चोटों के बारे में जानकारी दी। एम्स ऋषिकेश की स्त्री रोग विभाग की डॉ. लतिका चावला ने प्रतिभागी चिकित्सकों व नर्सिंग ऑफिसरों को गर्भवती महिलाओं को लगने वाली चोटों एवं इससे जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखने की जानकारी दी।
इस मौके पर ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम, कोर्स निदेशक डॉ. मधुर उनियाल, डॉ. अजय कुमार, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. दिवाकर गोयल, महेश, चंदू, जोमन, अरुण आदि थे।