ऋषिकेश। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ तीर्थनगरी में हाईवे चौड़ीकरण और आईडीपीएल के अधिग्रहण की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई है। स्थानीय व्यापारी शुरुआत से हाईवे चौड़ीकरण विरोध कर रहे हैं। वहीं आईडीपीएल में रहने वाली हजारों की आबादी भी सरकार के खिलाफ मुखर हो गई है। ऐसे में मौजूदा माहौल को भांपते हुए राजनीतिक पार्टियां व्यापारियों और स्थानीय जनता को नाराज कर चुनावी खेल को नहीं बिगाड़ना चाहते हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले तीर्थनगरी में मुख्य मार्ग पर जाम की समस्या से निजात मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। घाट रोड से चंद्रभागा के बीच हाईवे चौड़ीकरण की कवायद करीब एक दशक पूर्व शुरू हुई थी। वर्ष 2011 में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड ने महायोजना के तहत हाईवे चौड़ीकरण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, लेकिन मुख्य मार्ग में अतिक्रमण के चिह्नीकरण के दौरान विभाग को व्यापारियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में हर बार हाईवे चौड़ीकरण कार्रवाई अटक जाती थी। लंबे इंतजार के बाद इसी महीने जुलाई माह में हाईवे चौड़ीकरण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड ने टेंडर किए थे। पहले चरण में कोयलग्रांट से घाट चौराहे तक 1.7 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क का निर्माण होना था, जबकि घाट रोड से चंद्रभागा तक 500 मीटर लंबी फोरलेन सड़क दूसरे चरण में बनाई जानी थी, लेकिन टेंडर के बाद चार महीने बीतने के बाद एक इंच भी फोरलेन सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में साफ है कि भाजपा सरकार विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर व्यापारियों से बैर नहीं लेना चाहती है। वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी हाईवे चौड़ीकरण का मुद्दा न उठाकर व्यापारियों के निशाने पर आने से बच रही हैं। उधर इसी साल 27 नवंबर को आईडीपीएल की लीज समाप्त हो चुकी है। वन विभाग ने आईडीपीएल की 830 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की तैयारी भी शुरू कर ली थी। इसमें से 200 एकड़ भूमि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश को विस्तारीकरण के लिए सौंपी जानी है, लेकिन आईडीपीएल में विभिन्न कालोनियों के लोगों ने अधिग्रहण के विरोध और क्षेत्र को नगर निगम में शामिल करने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मांग को लेकर धरना प्रदर्शन और अनशन का दौर जारी है। आईडीपीएल में हजारों की आबादी रहती है। सरकार अच्छे से जानती है इतनी बड़ी आबादी नाराज करना चुनावी समीकरण को बिगाड़ सकता है। यही कारण है स्थानीय विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल शासन में लगातार आईडीपीएल क्षेत्र की कालोनियों को नगर निगम में शामिल करने की पैरवी कर रहे हैं। इससे हाईवे विस्तारीकरण और आईडीपीएल की भूमि के अधिग्रहण दोनों पर ही ब्रेक लग गया है।