महासंघ अध्यक्ष जगमोहन सकलानी ने बताया कि पुरानी समर्पण (सरेंडर) पॉलिसी में गाड़ी को सरेंडर करने की कोई समय सीमा नहीं थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार की ओर से पहले तीन महीने, फिर तीन महीने सरेंडर करने का नियम बना रखा है।
उत्तराखंड ट्रक परिवहन महासंघ की ओर से एक होटल में बैठक आयोजित की गई। इसमें पुरानी समर्पण (सरेंडर) पॉलिसी लागू करने और छह माह के टैक्स में छूट देने की मांग की गई।
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महासंघ अध्यक्ष जगमोहन सकलानी ने बताया कि पुरानी समर्पण (सरेंडर) पॉलिसी में गाड़ी को सरेंडर करने की कोई समय सीमा नहीं थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार की ओर से पहले तीन महीने, फिर तीन महीने सरेंडर करने का नियम बना रखा है। इससे ट्रक और बस ऑपरेटरों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि सभी ट्रक ऑपरेटरों को टैक्स में छह माह की छूट दी जाए।
ट्रक चालक परिचालकों को भी छह माह तक दो-दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। हरियाणा 10 टायरा ट्रकों कर चार महीने का टैक्स 6330 है, जबकि उत्तराखंड में पंजीकृत ट्रकों का टैक्स 9500 रुपये है। पूरे देश में एक समान होना चाहिए।
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भारत सरकार की ओर से ट्रकों की भार क्षमता 16200 से बढ़ाकर 18500 किया गया था, जिसमें नौ मीटरी टन माल में पास ट्रक 12 टन माल ले जा सकता है, लेकिन उत्तराखंड में ऐसी गाडियों को पर्वतीय क्षेत्रों जाने की अनुमति नहीं दी जाती। जबकि हरियाणा और उत्तरप्रदेश में पंजीकृत ट्रक 12 टन माल लेकर बदरीनाथ तक जा रहे हैं। बैठक में मनोज ध्यानी, दिनेश बहुगुणा, आदेश सैनी, दीप शर्मा आदि उपस्थित थे।