ऋषिकेश। ऋषिकेश रोडवेज डिपो की 65 में से अधिकांश बसें रिट्रेड टायर (रबर चढ़े टायर) लगाकर दौड़ाई जा रही हैं। जिससे पर्वतीय और दिल्ली रूटों पर आवागमन करने वाली बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। डिपो में मोबिल ऑयल और पार्टस का भी लंबे समय से टोटा पड़ा है।
ऋषिकेश रोडवेज डिपो में 65 बसों में से छह बसें पार्टस के अभाव में वर्कशॉप में खड़ी हैं। वर्कशाप को मांग अनुसार बसों की मरम्मत के लिए जरूरी पार्टस नहीं मिल पा रहे हैं। वर्कशॉप इंजन पार्टस, ब्रेक शू, क्लच प्लेट जैसे जरूरी सामान नहीं है। हाल यह है कि मुख्यालय से बसों के लिए नए टायर तक नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे में चालक जोखिम उठाकर रिट्रेड टायर के भरोस पहाड़ी क्षेत्रों और दिल्ली रूटों पर बसें दौड़ा रहे है। यही नहीं रोडवेज रीजनल वर्कशाप से मोबिल ऑयल न आने से बसें पुराने मोबिल ऑयल से ही फर्राटा भर रही हैं। जिससे बसों का इंजन खराब हो रहा है। संवाद
छह महीने से है टायरों की समस्या
- रोडवेज वर्कशॉप में नए टायर न मिलने की समस्या लगभग छह महीने से है। रीजनल वर्कशॉप से नए टायर न आने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित होने बसों के आगे वाले टायरों पर रिट्रेड वाले टायर लगाए जा रहे हैं। यही हाल दिल्ली, अमृतसर, आगरा, सहारनपुर मार्ग पर संचालित होनी वाली बसों के हैं।
नहीं बदले जा रहे बसों के टूटे शीशे
- डिपो की जिन बसों के शीशे टूटे हैं, उन्हें बदला नहीं जा रहा है। जबकि किसी का संचालन करने से पहले उसके सभी शीशे साफ होने चाहिए। चालक परिचालकों के कहने के बावजूद बसों के टूटे शीशे बदले जा रहे हैं।
मुख्यालय से जितना सामान आता है वह रोडवेज की बसों में लगाया जाता है। शुक्रवार को देहरादून से मोबिल ऑयल और रिट्रेड टायर आ गए हैं। बस में जो भी तकनीकि दिक्कत आती है उसे तुरंत ठीक कराया जाता है।
- पवन गर्ग, सहायक फोरमैन, रोडवेज वर्कशॉप ऋषिकेश