हरीश रावत सरकार को गिराने में अहम् भूमिका निभाने वाले बर्खास्त बागियों को केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करा दी है। केंद्र ने जान की सुरक्षा को खतरा जताए जाने के बाद उन्हें अर्द्धसैनिक बल उपलब्ध कराए हैं।
आवास पर एक चार की गारद के साथ प्रत्येक बागी के लिए पर्सनल सिक्योरिटी अधिकारी उपलब्ध कराया है। हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, प्रदीप बत्रा, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल, अमृता रावत, उमेश शर्मा उर्फ काऊ रणनीति के तहत भाजपा विधायकों के साथ दिल्ली रवाना हो गए थे।
बागियों की विधानसभा सदस्यता समाप्त
जाते समय यह लोग राज्य सरकार की तरफ से उपलब्ध गनर वापस कर गए थे। प्रदेश की सियासत में एक के बाद एक आए भूचाल में राष्ट्रपति शासन लगने के साथ उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई।
बदले हालातों में बर्खास्त बागियों की सुरक्षा को खतरा था। उन्होंने राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार से सुरक्षा मांगी थी। बागियों के घरों पर एक हेड कांस्टेबिल और तीन जवानों की गारद उपलब्ध कराई गई है। आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के लिए पीएसओ प्रत्येक बागी के साथ रहेगा।