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अब राहत भी सेना के भरोसे

Tue, 16 Jul 2013 11:03 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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इसे आपदा में तबाही का व्यापक स्वरूप कहें अथवा सिविल प्रशासन की नाकामी एक लाख से ज्यादा लोगों को बचाने वाली सेना ही राहत में भी मददगार बनी हुई है।
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रसद पहुंचाने से लेकर सड़क मार्गों के निर्माण में सेना अपना सहयोग दे रही है। राहत के नाम पर राज्य सरकार की सुस्त रफ्तार को गति देने के लिए सेना वायुसेना के 15 हेलीकाप्टर उड़ाने भर रहे हैं।

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केदारघाटी तक पहुंचने में जहां राज्य सरकार के हाथ पांव फूल गए वहीं सेना की रेजमेंट ने एक नया पैदल वैकल्पिक मार्ग निर्मित कर दिया। दुनिया की सबसे बड़े हेलीकाप्टर बचाव अभियान से हजारों लोग वायुसेना व सेना ने हजारों को बचाया।
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18 जून से सेना व अर्धसैन्य बलों के 12 हजार जवान और 49 हेलीकाप्टरों के साथ 5 विमानों ने 20 दिन में चार धाम में फंसे हर स्थानीय व तीर्थ यात्री को बाहर निकाल लिया था। अब राहत कार्य में सहयोग के लिए जहां सेना और आईटीबीपी के जवान मदद में जुटे हैं वहीं वायुसेना के बड़े और छोटे 10 हेलीकाप्टर तैनात हैं।

आपरेशन केदार घाटी जारी
केदारघाटी में राहत अभियान अब भी सेना और वायुसेना के भरोसे है। वायुसेना के एमआई 26 और एमआई 17 हेलीकाप्टर राज्य सरकार के 74 सदस्यीय दल को शवों के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाने के साथ रसद मुहैया करवा रहे हैं।

केदार घाटी में सेना को पैदल ट्रैक से भेज कर सोनप्रयाग से केदारनाथ मंदिर तक 20 किलोमीटर का रूट बनाया गया है। खराब मौसम में इसका इस्तेमाल सिविल प्रशासन राहत सामग्री केदार मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
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एमआई 26 है सबसे बड़ा सहारा
राहत कार्यों में एयरफोर्स का एमआई 26 हेलीकाप्टर सबसे बड़ा सहारा है। 20 टन वजन उठाने की क्षमता वाला हेलीकाप्टर भारी उपकरणों के साथ राहत सामग्री पहुंचाने में मददगार है। पिथौैरागढ़ में 12 जुलाई को बीआरओ के लिए क्षतिग्रस्त रोड निर्माण के बुलडोजर इसी की मदद से पहुंचाए गए। वहीं केदारघाटी में मशीनें पहुंचाने का जिम्मा भी इसी हेलीकाप्टर पर है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा।

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