नाउम्मीदी के अंधेरे और टूटते हौसले के बीच कृत्रिम पांव से एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा जिले के आपदा पीड़ितों में जिंदगी के लिए जंग का जज्बा जगा गईं।
अरुणिमा को दुर्गम रास्तों चलकर पीड़ितों के लिए मदद को आया देखकर बहुतों का हौसला भी लौट आया। असी गंगा घाटी के आपदा पीड़ित अगोड़ा गांव तक पहुंचकर अरुणिमा और उनकी टोली ने पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की।
चनती ट्रेन से फेंका था नीचे
उल्लेखनीय यह है कि अरुणिमा एवरेस्ट चढ़ने पर मिली 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि में से पांच लाख की राहत सामग्री खरीद डाली। स्पोर्ट्स पर्सन अरुणिमा सिन्हा तब चर्चा में आई थीं जब कुछ असामाजिक तत्वों ने उन्हें चलती ट्रेन से फेंक दिया था।
इस घटना में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा था। कोई दूसरा होता तो मायूस हो जाता। लेकिन अरुणिमा का हौसला दोगुना हो गया। कृत्रिम पैरों के सहारे ही दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वतशिखर एवरेस्ट को नाप लिया।
पर सफल आरोहण करने वाली अरुणिमा आपदा पीड़ितों के लिए भी एक मिसाल बनकर सामने आई। उसने एवरेस्ट चढ़ने पर मिली 25 लाख की पुरस्कार राशि में से 5 लाख की राहत सामग्री ली और पहुंच गई उत्तरकाशी के आपदा पीड़ितों के बीच।
घाटी से है अरुणिमा का पुराना जुड़ाव
असी गंगा घाटी से अरुणिमा का पुराना जुड़ाव है। एवरेस्ट आरोहण से पूर्व उसने इसी घाटी में प्रथम भारतीय महिला एवरेस्टर बछेंद्री पाल से पहाड़ चढ़ने के गुर सीखे थे। बीते रोज उत्तरकाशी पहुंची अरुणिमा ने असी गंगा घाटी पहुंचकर आपदा पीड़ितों के हाल जाने।
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कुछ को मौके पर तथा बाकी को जिला मुख्यालय बुलाकर उन्हें राहत सामग्री वितरित की। राहत सामग्री तो कई स्वयंसेवी संस्थाएं बांट रही हैं, लेकिन अरुणिमा को अपने बीच पाकर आपदा पीड़ितों का हौसला बढ़ गया है।