आपदा से उत्तराखंड के गांवों के संपर्क मार्ग ध्वस्त होने से चमोली जिले के लिंगड़ी गांव के 140 परिवार गांव में कैद होकर रह गए हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण राहत में मिले तेल और आटे के दीये बनाकर रात गुजार रहे हैं।
शुक्रवार रात्रि हुई बारिश से गांव के ठीक पीछे थली पातल नामक तोक से भूस्खलन शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। लिंगड़ी गांव पिंडर नदी में आई जलप्रलय से अलग-थलग पड़ गया है।
यहां पिछली तीन जुलाई को हेलीकॉप्टर से 320 किलो चावल, 63 किलो आटा, 100 किलो दाल, नमक, बिस्कुट, एक-एक मोमबत्ती, दो माचिस, एक-एक पैकेट नमक, 10 किलो तेल दिया गया। एक परिवार के हिस्से में तीन किलो चावल, एक किलो दाल, 200 ग्राम आटा और 4-4 सौ ग्राम सरसों का तेल आया।
ग्रामीण राजेंद्र सिंह भंडारी, प्रेम सिंह भंडारी, गोपाल जोशी का कहना है कि बोरागाड़ बाजार से लिंगड़ी गांव की दूरी मात्र 250 मीटर है, लेकिन यहां पुल बहने से ग्रामीण बाजार पहुंचने के लिए 16 किमी अतिरिक्त सफर तय कर रहे थे।
ग्रामीणों के रिश्तेदार चीनी, चायपत्ती और जरूरी सामान लेकर गांव पहुंच रहे हैं। गांव के मदन बिष्ट की बेटी की शादी सितंबर में होनी थी, लेकिन मार्ग ध्वस्त होने से फिलहाल शादी टाल दी गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
'ग्रामीणों को रसद देने के लिए बोरागाड़ बुलाया गया था। किस-किस को राशन दी गई, इसकी सूची तैयार की जा रही है। ग्रामीणों को एक-एक लीटर मिट्टी तेल भी दिया गया है।'
एमएस राणा, जिला पूर्ति अधिकारी, चमोली।
'मौसम ठीक होने पर लिंगड़ी में पुन: हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री भेजी जाएगी। क्षेत्र में जिला विकास अधिकारी गए हुए हैं, उनकी रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्र में रसद भेजी जाएगी।'
नंद किशोर जोशी, जिला आपदा अधिकारी, चमोली।