चारधाम यात्रा व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार कभी भी गंभीर नहीं रही। खासकर धामों को जाने वाले यात्रियों के पंजीकरण में बरती गई लापरवाही के कारण बीते सप्ताह की प्राकृतिक आपदा के बाद सरकार प्रभावित यात्रियों की सही संख्या नहीं बता पा रही है।
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सरकार की लापरवाही का खामियाजा यात्रियों के परिजनों को दर-दर भटककर भुगतना पड़ रहा है। सरकार अथवा उसके द्वारा संचालित रोटेशन द्वारा संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति को नियमानुसार संचालित करने की कोशिश की गई होती तो यात्रियों को मदद में दिक्कतें नहीं आती।
नगर पालिका करती है रजिस्ट्रेशन
चारधाम यात्राकाल में धामों को जाने वाले वाहनों का संयुक्त रोटेशन और नगर पालिका की ओर से पंजीकरण किया जाता है। पंजीकृत होने के बाद किसी भी दुर्घटना अथवा आपात स्थिति में संबंधित वाहनों में यात्रा कर रहे लोगों के नाम, संख्या, पता आदि की समुचित जानकारी उपलब्ध हो सकती है।
सरकार, स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग की ओर से कभी इस व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से लागू करने की जहमत नहीं उठाई गई। रिकार्ड के अभाव में इस वर्ष आपदा के चलते केदारघाटी और अन्य स्थानों पर फंसे और लापता हुए लोगों के बारे में सरकार से कुछ बताते नहीं बन रहा है।
दरअसल इस वर्ष सरकार द्वारा रोटेशन को सरकारी जामा तो पहनाया गया, मगर उसके तहत यात्रा पर जाने वाले अन्य निजी परिवहन कंपनियों, ट्रेवल एजेंसियों, निजी वाहनों और यात्रियों के पंजीकरण की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया गया।
चार सौ 65 लोगों का ही रिकार्ड
करीब एक महीने आठ दिन चली यात्रा में 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं के मुकाबले रोटेशन के पास महज 1878 बसों और 55 हजार चार सौ 65 लोगों का ही रिकार्ड है। जिसे 10 मई से 16 जून 2013 तक पंजीकृत किया गया है। इसके अलावा नगर पालिका ऋषिकेश की ओर से इसी समयावधि में कुल एक लाख 33 हजार 359 यात्रियों का पंजीकरण किया गया है।
जबकि अन्य लाखों श्रद्धालुओं का पंजीकरण अनिवार्य नहीं समझा गया। सरकार स्तर पर बरती जा रही इसी कोताही का नतीजा है कि सरकार के पास आपदा पीड़ित श्रद्धालुओं की संख्या, नाम, पते कुछ नहीं है। नतीजतन पीड़ितों के परिजन अपनों की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को अभिशप्त हैं।
क्या हैं कारण
इस वर्ष पंजीकरण की संख्या में कमी का एक कारण संयुक्त रोटेशन व्यवस्था में विघटन भी रहा है। निजी कंपनियों के एक छत के नीचे नहीं आने के कारण सरकार ने यात्रा ज्वाइंट रोटेशन का नोटिफिकेशन तो किया, मगर उनके संचालन में कई नियमों की अनदेखी की गई।
यात्राकाल में ऋषिकेश से संचालित और पंजीकृत यात्रा वाहनों के मुकाबले कई गुना अधिक यात्रा वाहन हरिद्वार से संचालित किए गए। जिनका कहीं कोई लेखा जोखा नहीं रखा गया, न ही स्थानीय प्रशासन, रोटेशन और परिवहन विभाग द्वारा चेक पोस्टों पर ऐसे वाहनों की चेकिंग या उनमें सवार लोगों के पंजीकरण में कोई दिलचस्पी दिखाई गई।
नहीं मिलेगा बीमे का लाभ
राज्य सरकार के पास यात्रा के दौरान आपदा की जद में आने वाले हजारों लोगों (मृतक/लापता) लोगों का कोई पंजीकृत रिकार्ड नहीं है। ऐसे में सरकार को ऐसे श्रद्धालुओं को मुआवजे के आवंटन में भी तकनीकी दिक्कतें आएंगी। पर्यटन विभाग की ओर से चारधाम यात्रियों की बीमा योजना दो साल से लंबित है, जिसे दूसरे साल भी लागू नहीं किया जा सका।