अंतत: भाजपा और कांग्रेस के बागी नौ विधायकों का कहना सही निकला। 18 मार्च को सदन में बजट पास नहीं हुआ था और इस लिहाज से उत्तराखंड सरकार उसी दिन अल्पमत में आ गई थी। इसलिए पहली बार राज्य के बजट को राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी।
बाद में इसे लोकसभा से पारित कराया जाएगा। बजट में बदलाव की गुंजाइश तो नहीं के बराबर है, इसलिए जो वित्त विनियोग विधेयक का जो ड्राफ्ट 18 मार्च को विधानसभा में पेश हुआ था, उसे ही 29 मार्च तक केंद्रीय गृहमंत्रालय को भेजा जाएगा, ताकि राष्ट्रपति से मंजूरी ले ली जाए। इसके बाद ही लोकसभा सत्र शुरू होने पर सदन से बजट को पास करा लिया जाए।
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने वित्त विभाग को अलर्ट कर दिया है, विधानसभा से वित्त विनियोग विधेयक के ड्राफ्ट को मंगा लिया है। वित्त विभाग की टीम ने होमवर्क शुरू कर दिया है। वित्त सचिव एमसी जोशी के नेतृत्व में एक टीम विनियोग विधेयक को लेकर सोमवार तक केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी। ताकि बजट को मंजूरी मिल सके।
वैधानिक रूप से यही माना गया कि 18 मार्च को विधानसभा में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बजट पारित नहीं हुआ। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया तो विनियोग विधेयक अब केवल राष्ट्रपति या लोकसभा ही पारित कर सकती है।
अनुच्छेद 357 में है राष्ट्रपति को अधिकार
यदि किसी राज्य में निर्वाचित राजनैतिक सरकार नहीं है, तो संबंधित राज्य का बजट लोकसभा से पारित कराना होता है। यदि लोकसभा सत्र गतिमान नहीं है या गतिमान है और लंबा ब्रेक है तो ऐसी परिस्थितियों में अनुच्छेद 357 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि बजट को मंजूरी दे दे। और बाद में बजट को लोकसभा से पारित करा लिया जाए।