केदारनाथ-गौरीकुंड घाटी में फंसे ज्यादातर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को निकाल लिया गया है। अब प्रशासन के सामने खड़ी अगली बड़ी चुनौती वहां बिखरे पड़े शवों का जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करना है, वरना पहले से त्रासदी झेल रहे पहाड़ में गंभीर महामारी फैलने का डर है।
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इस सिलसिले में आपातकालीन उपाय के तहत केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद समेत शीर्ष धर्मगुरुओं से बातचीत कर ली है।
सवाल यह उठता है कि क्या सामूहिक दाह संस्कार से मंदिर परिसर अपवित्र हो जाएगा? लेकिन धर्मगुरुओं का कहना है कि अगर अंतिम संस्कार सभी नियमों का पालन करते किया जाएगा, तो ऐसा कुछ नहीं है।
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इसके बाद स्थानीय डिपो से 150 क्विंटल लकड़ियां गोचर भेजी गई हैं। यह खेल सोमवार को वहां पहुंच गया। यहां से हेलीकॉप्टर के जरिए लकड़ियां केदारनाथ ले जाएंगी। क्योंकि वहां कई शव हैं, ऐसे में बड़ी मात्रा में लकड़ियों की जरूरत होगी। इसलिए हेलीकॉप्टरों को कई चक्कर लगाने होंगे।
इस बीच कीड़े-मकोड़े वहां पड़े शवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गौरीकुंड, बदरीनाथ, रामबाड़ा में लावारिस पड़े कई शवों की आंखें गायब हैं। कई शवों के हाथ-पैर और छाती का मांस गायब है।
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वहां सड़ांध फैल रही है। आईएमए के डाक्टर वापस आ गए हैं। कार्यवाहक महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण डा. जेएस जोशी ने बताया कि मंगलवार से शवों का दाह संस्कार शुरू हो जाएगा।
पहाड़ों पर सेवा कार्य करके लौटे डाक्टरों का कहना है कि स्थिति बहुत खराब है। शवों के ऊपर शव पड़े हैं। इनमें सड़ांध पैदा हो गई है। वहां का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
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आईएमए के प्रदेश सचिव डा. डीडी चौधरी ने बताया कि जो लोग बचे हैं, उन्हें वायरल संक्रमण, निमोनिया और खूनी पेचिश होने लगी है। उन्होंने बताया कि आईएमए की टीम वापस आ गई है।
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एसोसिएशन की टीम में डा. हरीश कोहली, डा. राकेश कालरा, डा. गुलशन, डा. सौरभ मेहरा, डा. विक्रांत मेहरा आदि गए थे। कार्यवाहक महानिदेशक डा. जेएस जोशी ने बताया कि फोरेंसिक टीम पहाड़ पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि बहुत से शव अभी भी मलबे में दबे पड़े हैं, उन्हें भी निकाला जाना है।