आपदा की इस घड़ी में जहां पूरा देश पीड़ितों की मदद के लिए आगे आया है, वहीं उत्तराखंड के नेताओं में टीवी चैनलों पर छाने की जबरदस्त होड़ मची है। नेता मर्यादा भी भूल गए।
मीडिया पर पब्लिसिटी पाने की चाह में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी परंपराओं को तिलांजलि दी।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
वह इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों को लेकर केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंच गए और प्रतिबंधित क्षेत्र का कवरेज करा दिया। साधु-संतों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है।
आपदाग्रस्त केदारघाटी में कदम-कदम पर आपदा पीड़ित कराह रहे हैं, पर इस इलाके में हवाई दौरा कर रहे नेताओं के कानों तक उनकी आवाज नहीं पहुंच रही हैं। लगता है इन नेताओं को पीड़ितों की नहीं बल्कि मीडिया में छाने की चिंता ज्यादा है।
तमाम मर्यादाएं लांघ
राज्य के कृषि मंत्री हरक सिंह जहां चॉपर में पत्रकारों के साथ उड़ते देखे जा रहे हैं, वहीं केदारनाथ में सब कुछ तबाह होने के कई दिन बाद वहां पहुंचे मंदिर समिति अध्यक्ष गोदियाल उनसे दो कदम आगे निकल गए। गौचर हेलीपैड से टीवी रिपोर्टरों को लेकर केदारनाथ पहुंचे गोदियाल ने तमाम मर्यादाएं लांघ दी।
न्यूज चैनलों पर समिति अध्यक्ष के दौरे की खबर प्रसारित होने के बाद लोग भड़क गए हैं। अध्यक्ष के इस कारनामे से खिन्न सुभाष पुरोहित और मोहन वशिष्ठ ने बताया कि गोदियाल जूतों सहित मंदिर के अंदर चले गए। जबकि पत्रकार जूते उतार कर अंदर गए थे।
मंदिर के गर्भगृह की फोटो लेना भी वर्जित है। उन्होंने सवाल किया कि गोदियाल मंदिर के अंदर का दृश्य दिखाकर क्या साबित करना चाहते हैं।
व्यवहार पर ऐतराज जताया
शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने भी इस गोदियाल के इस व्यवहार पर ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की मर्यादाएं होती हैं। इनका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। मंदिर के अंदर कैमरा नहीं ले जाना चाहिए था।