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राज्यपाल का संदेश कहीं राष्ट्रपति शासन की आहट तो नहीं?

Fri, 25 Mar 2016 12:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राज्यपाल द्वारा स्पीकर को भेजे गए संदेश के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। - फोटो : AmarUjala
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तो क्या प्रदेश राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है, बुधवार को राज्यपाल की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए संदेश का राजनीतिक हलकों में एक मायने यह भी निकाला जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो राष्ट्रपति शासन के लिए तीन तरह से स्थितियां बनती हैं। जब प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हो। प्रदेश में कोई वित्तीय संकट उठ खड़ा हुआ हो या राजनीतिक अस्थिरता हो।
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राज्यपाल के संदेश में पहली दो स्थितियों की ओर कोई संकेत नहीं किया गया है। ऐसे में राज्यपाल का संदेश बहुत हद तक तीसरी स्थिति की ओर इशारा करता दिख रहा है।

राज्यपाल ने साफ कहा है कि मत विभाजन की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करने वाली साबित हो। ऐसा कहते हुए राज्यपाल एक तरह से मौजूदा हालात पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं।
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वित्तीय संकट के विपक्ष के सवाल पर खामोशी

हरक सिंह रावत
राज्यपाल ने जिस अधिकार के तहत विधानसभा को संदेश भेजा है, उसमें राज्यपाल को विधानसभा में किसी लंबित मामले में संदेश देने का अधिकार है। वित्त विधेयक पर राज्यपाल ने विपक्ष के आरोप का जिक्र तो किया है पर इस मामले में अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की है।

ऐसे में विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे वित्तीय संकट के सवाल पर यह संदेश खामोश है। कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने का भी इस पत्र में कोई जिक्र नहीं है।

राज्यपाल ने पत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने का जिक्र कर यह भी साफ संदेश दे दिया है कि यही एक मामला है जिसमें कोई कसर रह गई है। ऐसे में राज्यपाल का यह संदेश तीसरी स्थिति में राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ा हुआ कदम बनता माना जा रहा है।
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